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Court News: NIA केस में माओवादी कमांडर का सहयोगी बताये गये शैलेश्वर उरांव को जमानत नहीं

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 04 Jun, 2026
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Ranchi News: एनआईए के विशेष न्यायाधीश अभिमन्यु कुमार की अदालत ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन सीपीआई (माओवादी) के सक्रिय सदस्य होने के आरोपी शैलेश्वर उरांव उर्फ मंदीप उर्फ कसाई की जमानत याचिका खारिज कर दी है। वह जुलाई 2022 से न्यायिक हिरासत में है और उसके खिलाफ एनआईए के विशेष मामले संख्या 03/2022 में सुनवाई चल रही है। अदालत के समक्ष एनआईए ने कहा कि शैलेश्वर उरांव माओवादी नेता रविंद्र गंझू के दस्ते का सदस्य था और लातेहार-लोहरदगा क्षेत्र में सक्रिय था। जांच में सामने आया कि फरवरी 2022 में बुलबुल जंगल में माओवादियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमला करने की साजिश रची थी। इसी दौरान आईईडी विस्फोट और गोलीबारी में सुरक्षा बलों के जवान घायल हुए थे। घटनास्थल और आसपास के जंगलों से भारी मात्रा में हथियार, कारतूस, विस्फोटक सामग्री, नक्सली साहित्य तथा अन्य सामान बरामद किए गए थे।

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एनआईए ने अदालत को बताया कि संरक्षित गवाहों के बयानों, जब्त दस्तावेजों, फोटो पहचान और आरोपियों के कथित स्वीकारोक्ति बयानों से शैलेश्वर उरांव की संलिप्तता सामने आई है। गवाहों ने उसे बुलबुल जंगल में बने बंकरों, आईईडी लगाने, माओवादी बैठकों में भाग लेने और संगठन की गतिविधियों से जुड़ा बताया है। जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि आरोपी के खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में चार अन्य आपराधिक मामले दर्ज हैं।

बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है, उसके पास से कोई बरामदगी नहीं हुई है और वह चार वर्षों से अधिक समय से जेल में है। साथ ही ट्रायल की गति धीमी होने का हवाला देते हुए जमानत की मांग की गई। हालांकि अदालत ने माना कि आरोप प्रथमदृष्टया सही प्रतीत होते हैं और यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर कानूनी रोक लागू होती है।

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अदालत ने कहा कि केस डायरी, आरोपपत्र, संरक्षित गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि आरोपी माओवादी संगठन का सक्रिय सदस्य था तथा सुरक्षा बलों पर हमले की साजिश और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल रहा है। इन परिस्थितियों में उसे जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। इसलिए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

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