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Civil Court News: डीजीपी तक भी नहीं भेज सके गवाहों को, No Evidence के तहत जमीन कब्जा व फायरिंग मामले में आरोपी कमलेश कुमार बरी

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By CourtNews Desk On 24 Mar, 2026
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Kamlesh Singh
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Ranchi News: Civil Court रांची के अतिरिक्त न्यायायुक्त-17 की अदालत ने जमीन कब्जा और फायरिंग के आरोप से जुड़े एक मामले में आरोपी कमलेश कुमार उर्फ कमलेश कुमार सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।इस मामले में वह करीब 8 महीने जेल भी काट चुका था। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। मामला कांके थाना कांड संख्या 195/2024 से संबंधित था। जिसमें 2 जुलाई 2024 को आरोप लगाया गया था कि आरोपी अपने साथियों के साथ डाली कटारी स्थित गैरमजरुआ जमीन पर अवैध कब्जा कर रहा था। विरोध करने पर ग्रामीणों को हथियार दिखाकर धमकाया गया और हवाई फायरिंग कर दहशत फैलाने का भी आरोप था। पुलिस ने जांच के बाद 17 अक्टूबर 2024 को आरोप पत्र दाखिल किया और अदालत ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में आरोप तय किया। हालांकि, ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष एक भी गवाह पेश नहीं कर सका। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि मामले में न तो कोई गवाह प्रस्तुत किया गया और न ही कोई ठोस साक्ष्य रखा गया। कई अवसर दिए जाने के बावजूद अभियोजन पक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा। ऐसे में केवल आरोप के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी करते हुए उसे जमानत बंधन से भी मुक्त कर दिया।

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अदालत ने गवाहों को पेश कराने के लिए कई ठोस कदम उठाए, लेकिन इसके बावजूद अभियोजन पक्ष गवाह प्रस्तुत नहीं कर सका। आदेश में जिन कदमों का उल्लेख है, वे इस प्रकार है:
गवाहों को बुलाने के लिए समन (Summons) जारी।
समन के बावजूद गवाह उपस्थित नहीं हुए तो उनके खिलाफ वारंट (BW/A – Bailable Warrant) जारी किया गया।
संबंधित थाना के थाना प्रभारी (O.C.) को गवाह प्रस्तुत कराने के लिए पत्र भेजा गया।
जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को भी निर्देश दिया गया कि गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए।
राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी पत्र लिखकर गवाहों को पेश कराने के लिए कहा गया।
अदालत ने बार-बार निर्देश देकर अभियोजन पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त अवसर (Last opportunity सहित) दिया।
इसके बावजूद जब कोई गवाह या साक्ष्य पेश नहीं किया गया, तो अदालत ने माना कि अभियोजन अपने आरोप साबित करने में विफल रहा और आरोपी को बरी कर दिया।

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