Ranchi News: चतरा जिले के टंडवा स्थित मगध और आम्रपाली कोयला परियोजनाओं में तृतीया प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) द्वारा टेरर फंडिंग और लेवी फंडिंग के हाई-प्रोफाइल मामले में एनआईए (NIA) की विशेष अदालत ने मंगलवार को ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। एनआईए के विशेष न्यायाधीश अभिमन्यु कुमार की अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए सभी 12 अभियुक्तों को 5 से 10 वर्ष तक के कठोर कारावास और ₹40,000 से लेकर ₹90,000 तक के अर्थदंड (जुर्माने) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि आतंकवाद व उग्रवाद से अर्जित आय के रूप में जब्त या कुर्क की गई तमाम संपत्तियों को कानून के प्रावधानों के तहत स्थायी रूप से सरकार के पक्ष में जब्त (Forfeited) किया जाएगा।
सजा पाने वाले दोषियों की सूची :
- टीपीसी के सक्रिय सदस्य बिंदेश्वर गंझू उर्फ बिंदू गंझू, लक्ष्मण गंझू उर्फ कोहराम, मुनेश गंझू, बीरबल गंझू, मुकेश गंझू उर्फ मुनेश्वर गंझू, भीखन गंझू उर्फ दीपक गंझू, अनिश्चय गंझू और प्रदीप राम उर्फ प्रदीप वर्मा, विनोद कुमार गंझू, संजय जैन, प्रेम विकास उर्फ मंटू सिंह और सुभान मियां को पांच से 10 साल कारावास की सजा सुनाई गई।
अदालत की मुख्य बिंदु व निर्देश: अदालत ने 12 अगस्त को ही इन सभी 12 आरोपियों को विभिन्न धाराओं में दोषी करार दिया था। सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान सुरक्षा कारणों से जेल में बंद सभी अभियुक्तों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए कोर्ट के समक्ष पेश किया गया। सुनवाई के दौरान एनआईए के विशेष अभियोजक ने उग्रवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए अधिकतम सजा की मांग की, जबकि बचाव पक्ष ने न्यूनतम सजा की गुहार लगाई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी दोषियों को विभिन्न धाराओं में सुनाई गई सजाएं एक साथ (Concurrently) चलेंगी। इसके अतिरिक्त, टंडवा थाना कांड संख्या 02/2016 और एनआईए द्वारा दर्ज आरसी केस संख्या 06/2018 के तहत अभियुक्तों द्वारा पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि (Set-off) को उनकी कुल सजा में समायोजित किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला? यह पूरा मामला चतरा के मगध और आम्रपाली कोल प्रोजेक्ट क्षेत्र में काम करने वाले ठेकेदारों, ट्रांसपोर्टरों, डीओ (Delivery Order) धारकों और कोयला व्यापारियों से संगठित तरीके से रंगदारी/लेवी वसूलने से जुड़ा हुआ है। लेवी की रकम न देने पर कारोबारियों को जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं। इस अवैध वसूली से प्राप्त करोड़ों रुपये की भारी-भरकम राशि को प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीपीसी (TPC) को आर्थिक रूप से मजबूत करने और आधुनिक हथियार खरीदने के लिए पहुंचाया जाता था। एनआईए ने टंडवा पुलिस से जांच अपने हाथ में लेकर चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके आधार पर कोर्ट ने यह अंतिम फैसला सुनाया है।

