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बोकारो की लापता किशोरी के मामले की जांच करेगी सीबीआई, 6 साल में नहीं ढूंढ पाई CID

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 27 Aug, 2026
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बोकारो की लापता किशोरी के मामले की जांच करेगी सीबीआई, 6 साल में नहीं ढूंढ पाई CID
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Ranchi:  HC News: गुरुवार को जस्टिस सुजीत नारायण और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत ने बोकारो (Bokaro) के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र से वर्ष 2020 में लापता हुई नाबालिग लड़की का अब तक सुराग नहीं मिलने के मामले की जांच सीबीआई ( CBI) को सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सीबीआई को जांच तत्काल अपने हाथ में लेने और राज्य की सीआईडी से पूरा केस रिकॉर्ड प्राप्त करने का निर्देश दिया है। साथ ही सीबीआई के निदेशक को जांच की नियमित समीक्षा कर प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करने को कहा है।

मामला बोकारो के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र का है। 16 अक्तूबर 2020 को करीब 14 वर्ष की लड़की ट्यूशन जाने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। कुछ देर बाद सड़क पर उसकी साइकिल, चप्पल और किताबें बिखरी मिली थीं। इसके बाद परिजनों ने उसी दिन पिंड्राजोरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। करीब छह साल बीत जाने के बाद भी लड़की का पता नहीं चल सका।

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पहले पुलिस, फिर सीआईडी ने की जांच

लड़की की तलाश में पहले बोकारो पुलिस ने जांच की। बाद में 20 अप्रैल 2026 को मामला सीआईडी को सौंपा गया। हाईकोर्ट ने जांच की प्रगति पर कई बार सवाल उठाए। कोर्ट ने पाया कि सीआईडी की जांच में भी कोई ठोस प्रगति नहीं हुई और कई मामलों में पहले की जांच को ही दोहराया गया।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि नाबालिग के लापता होने के मामले में समय बेहद महत्वपूर्ण है। जितनी देर होती है, बच्चे के साथ अनहोनी की आशंका उतनी बढ़ती है। कोर्ट ने जांच में लापरवाही पर भी गंभीर चिंता जताई थी।

गोपालगंज में 90 फीसदी समानता मिली, पर पहचान की पुष्टि नहीं

जांच के दौरान एसआईटी को बिहार के गोपालगंज में एक महिला मिली, जिसका हुलिया लापता लड़की से करीब 90 प्रतिशत तक मिलता-जुलता बताया गया। यह समानता ई-केवाईसी के आधार पर सामने आई, लेकिन जांच एजेंसी उस महिला की पहचान लापता लड़की के रूप में सुनिश्चित नहीं कर सकी।

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कोर्ट ने इस पहचान की पुष्टि के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया। राज्य की ओर से कोर्ट को बताया गया कि झारखंड में गेट एनालिसिस जैसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा जांच में दिल्ली, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल से जुड़े डिजिटल सुराग मिलने की बात भी सामने आई। राज्य ने माना कि मामले में दूसरे राज्यों और संभवतः दूसरे देश तक मानव तस्करी की आशंका को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ाने की जरूरत है।

सोशल मीडिया और डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा

लापता लड़की का सुराग तलाशने के लिए फेसबुक-इंस्टाग्राम और गूगल समेत अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से पुराने रिकॉर्ड हासिल करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए संबंधित कंपनियों तथा टेलीकॉम और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं से डिजिटल रिकॉर्ड, सीडीआर और आईपीडीआर सुरक्षित रखने और उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।

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राज्य सरकार ने सीबीआई से जांच कराने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। सीबीआई की ओर से भी जांच अपने हाथ में लेने पर सहमति दी गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने गुरूवार को मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। सीआईडी को पूरा केस रिकॉर्ड सीबीआई के ईस्टर्न जोन के संयुक्त निदेशक को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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