Ranchi News: रांची स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने 21 वर्ष पुराने सीसीएल कोयला परिवहन मामले में तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक (परिवहन) पीवीएलएन प्रसाद तथा एम/एस रुंगटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि कमल किशोर प्रसाद को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और पद के दुरुपयोग के आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सका। 81 वर्षीय पीवीएलएन प्रसाद नागपुर के सरोज विला, जेरी पटक़ा रिंग रोड के निवासी हैं, जबकि 66 वर्षीय कमल किशोर प्रसाद मोराबादी, बरियातू, रांची के निवासी हैं।
सीबीआई के अनुसार, वर्ष 2002 में झारखंड ओपनकास्ट परियोजना से राजरप्पा वाशरी तक 1.5 लाख मीट्रिक टन कोयले के परिवहन का कार्य रुंगटा प्रोजेक्ट्स को 123.75 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से दिया गया। आरोप था कि यह कार्य प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया का पालन किए बिना अधिक दर पर दिया गया, जबकि प्रचलित दर कम थी। इससे सीसीएल को लगभग 24.78 लाख रुपये का नुकसान पहुंचा। इस मामले में 2 अप्रैल 2005 को प्राथमिकी दर्ज हुई और 12 सितंबर 2006 को आरोपपत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि सीबीआई यह साबित नहीं कर सकी कि स्वीकृत परिवहन दर वास्तव में बाजार दर से अधिक या अनुचित थी। अभियोजन उस समय की प्रचलित दर का विश्वसनीय साक्ष्य या विशेषज्ञ राय भी प्रस्तुत नहीं कर सका। अदालत ने यह भी माना कि राजरप्पा वाशरी में कोयले की गंभीर कमी थी और उत्पादन प्रभावित हो रहा था। ऐसी स्थिति में नियमित निविदा प्रक्रिया पूरी होने तक चार माह के लिए अस्थायी व्यवस्था करना आवश्यक था। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि केवल प्रक्रियागत अनियमितता या प्रशासनिक निर्णय से भ्रष्टाचार अथवा आपराधिक साजिश स्वतः सिद्ध नहीं होती। अभियोजन यह भी साबित नहीं कर सका कि दोनों आरोपितों के बीच किसी प्रकार की अवैध मिलीभगत थी या सरकारी पद का दुरुपयोग कर रुंगटा प्रोजेक्ट्स को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। पर्याप्त और ठोस साक्ष्य के अभाव में अदालत ने दोनों आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

