Ranchi News: भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा रुख अपनाते हुए रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के 19 साल पुराने एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने शुक्रवार को हजारीबाग बीएसएनएल में पूर्व टीएमओ (TMO) के पद पर कार्यरत रहे राम विनोद सिंह को दोषी करार देते हुए 3 साल के सश्रम कारावास (कठिन कारावास) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, अदालत ने दोषी पर 25 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया है। यदि दोषी इस जुर्माने की राशि को जमा करने में विफल रहता है, तो उसे एक वर्ष की अतिरिक्त साधारण जेल की सजा काटनी होगी। अदालत में मामले की निष्पक्ष और मजबूत पैरवी सीबीआई के लोक अभियोजक (PP) देवेंद्र पाल सूद ने की। उन्होंने गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को बेहद ठोस तरीके से अदालत के सामने प्रस्तुत किया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 1983 से 2007 के बीच का है, जब राम विनोद सिंह सेवा में रहते हुए अपनी आय के वैध स्रोतों से अधिक संपत्ति बना रहे थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय से लगभग 34 लाख रुपये अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित की थी। भ्रष्टाचार की पुख्ता जानकारी मिलने के बाद सीबीआई ने वर्ष 2007 में इस संबंध में एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर मामले की कमान संभाली थी।
सीबीआई की कार्रवाई और अदालत में पेश किए गए सबूत
जांच के दौरान सीबीआई ने आरोपी के विभिन्न ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में एजेंसी को निम्नलिखित साक्ष्य मिले थे:
- 68,000 रुपये की नकद राशि।
- बेनामी और अवैध रूप से खरीदी गई कई संपत्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज।
65 गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला
इस लंबे चले मुकदमे के दौरान सीबीआई ने आरोपी के खिलाफ शिकंजा कसने के लिए अदालत में कुल 65 गवाहों के बयान दर्ज कराए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, गवाहों के बयानों का बारीकी से अध्ययन करने और सीबीआई द्वारा पेश किए गए दस्तावेजी साक्ष्यों को सही पाते हुए राम विनोद सिंह को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी माना और यह सजा सुनाई।

