Ranchi News: फर्जी बिटुमेन इनवॉइस (अलकतरा घोटाला) से जुड़े 17 साल पुराने एक मामले में रांची स्थित सीबीआई (CBI) के विशेष न्यायाधीश कुलदीप (स्पेशल जज-II) की अदालत ने सोमवार (22 जून 2026) को अपना फैसला सुना दिया है। अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी और निजी व्यक्ति (ठेकेदार) झमन प्रसाद को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है, जबकि इस मामले में नामजद अन्य सभी 6 सरकारी कर्मचारियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत में सीबीआई, एसीबी, रांची की ओर से लोक अभियोजक (PP) सुशील कुमार ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा।
दोषी झमन प्रसाद को 3 साल की सजा और 1 लाख जुर्माना
सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी झमन प्रसाद को आईपीसी की धारा 468 और 471 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास (R.I.) की सजा सुनाई है और 40,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही, धारा 420 के तहत दोषी को 2 वर्ष की सजा और 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने दोषी पर कुल मिलाकर 1 लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया है। जुर्माना राशि जमा न करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त 6 महीने के सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी।
सभी 6 लोक सेवक (सरकारी कर्मचारी) हुए बरी
इस मामले में सीबीआई ने कुल 7 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद निजी व्यक्ति झमन प्रसाद को छोड़कर, बाकी सभी 6 लोक सेवकों को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया है। बरी होने वालों में शामिल हैं:
- उत्तम कुजूर- सहायक अभियंता, आरसीडी हजारीबाग
- राधा कृष्ण प्रसाद, सहायक अभियंता, आरसीडी हजारीबाग
- अखिलेश्वर सिंह, कनीय अभियंता, आरसीडी हजारीबाग
- ज्ञान चंद चौधरी, कनीय अभियंता, आरसीडी हजारीबाग
- भुवनेश्वर महतो, कनीय अभियंता, आरसीडी रामगढ़
- राम प्रकाश साहू, कनीय अभियंता, बीसीडी रांची
क्या था पूरा मामला?
यह मामला साल 2009 का है, जिसे सीबीआई ने RC-13(A)/2009-R के तहत दर्ज किया था। आरोप था कि दो ठेका कार्यों (Contractual Works) के निष्पादन के दौरान आरोपियों ने वास्तविक मात्रा से बेहद कम बिटुमेन (अलकतरा) का इस्तेमाल किया था। कार्य को सही दिखाने के लिए विभाग के समक्ष 13 फर्जी बिटुमेन इनवॉइस (बिल) पेश किए गए थे। जांच में सामने आया था कि कुल 114.616 मीट्रिक टन (MT) बिटुमेन का फर्जीवाड़ा किया गया था, जिसकी कुल कीमत 20,23,982 रुपये आंकी गई थी। सीबीआई ने जांच के बाद सभी 7 आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धारा 13(2) सह-पठित 13(1)(d) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।

