Ranchi News: बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ ज़मीन के फर्जीवाड़े और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) मामले में पीएमएलए (PMLA) की विशेष अदालत ने एक बड़ा कदम उठाया है। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में गुरुवार को इस मामले के 17 में से 14 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप गठित (Frame Charges) कर दिए गए हैं। करीब तीन साल तक चली गहन जांच और पूरक अभियोजन शिकायतों (Supplementary Prosecution Complaints) के बाद अदालत ने यह कार्रवाई की है।
तीन आरोपियों के लिए टला आरोप गठन
मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिनोद कुमार सिंह और राज कुमार पाहन पर फिलहाल आरोप गठित नहीं हो सके हैं। इन तीनों आरोपियों द्वारा अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की गई थी, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने इनके खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया फिलहाल टाल दी है। इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई अब 11 अगस्त को निर्धारित की गई है।
इन 14 आरोपियों पर तय हुए आरोप
विशेष अदालत ने जिन 14 आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत आरोप गठित किए हैं, उनके नाम निम्नलिखित हैं:
- भानु प्रताप प्रसाद (पूर्व राजस्व उपनिरीक्षक)
- तपस घोष
- शेखर कुशवाहा
- मोहम्मद सद्दाम हुसैन
- आनंद तिर्की उर्फ अंतु तिर्की
- अफसर अली
- मो. इरशाद अख्तर
- कुमार राजश्री
- मनोज कुमार यादव
- प्रिया रंजन सहाय
- बिपिन सिंह
- बिजेंद्र सिंह
- संजीत कुमार
- मोहम्मद इरशाद
क्या है पूरा मामला और ED का दावा?
यह पूरा मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा 26 फरवरी 2023 को दर्ज की गई ECIR संख्या 06/2023 से संबंधित है। ईडी ने इस मामले की जांच की शुरुआत सदर थाना कांड संख्या 272/2023 और पूर्व में मिली गुप्त सूचनाओं के आधार पर की थी।
ईडी के मुख्य आरोप:
- संगठित गिरोह द्वारा अवैध खरीद-बिक्री: ईडी का आरोप है कि आरोपियों ने एक संगठित गिरोह (Organized Syndicate) बनाकर बरियातू-बड़गाईं क्षेत्र की गैर-हस्तांतरणीय (Non-transferable) ‘भुईंहरी’ जमीन की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री की।
- काले धन को सफेद करने का प्रयास: इस फर्जीवाड़े और अपराध से अर्जित अवैध कमाई (Proceeds of Crime) को वैध धन के रूप में दिखाने की कोशिश की गई।
- करोड़ों का नकद लेनदेन: जांच के दौरान ED ने कई डायरियां जब्त की थीं, जिनमें करोड़ों रुपये के नकद (Cash) लेनदेन का साफ उल्लेख मिला है।
- ठोस वित्तीय व डिजिटल सबूत: ईडी ने अदालत में दावा किया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंक खातों के विवरण और अन्य दस्तावेजी सबूतों से सभी सह-आरोपियों के बीच आपसी संपर्क और वित्तीय लेनदेन की पुष्टि होती है।

