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Assistant Professor Appointment: हाईकोर्ट की टिप्पणी, 20 साल बाद भी सभी विभागों में संविदा पर नियुक्ति होना सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 25 Oct, 2021
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Ranchi: Assistant Professor Appointment झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अदालत में राज्य में संविदा पर कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति को चुनौती देने वाले मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कड़ी टिप्पणी की है।

अदालत ने कहा कि राज्य को बने 20 वर्ष से अधिक हो गए लेकिन अभी भी राज्य के महत्वपूर्ण पदों पर संविदा के जरिए ही बहाली हो रही है। ऐसा सिर्फ शिक्षा विभाग का हाल नहीं है, बल्कि अन्य विभागों में भी संविदा पर लोगों की नियुक्ति की जा रही है। ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों उल्लंघन है।

इस मामले में अदालत ने राज्य के सभी विश्वविद्यलायों को प्रतिवादी का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य सरकार और सभी विश्वविद्यालयों से जवाब मांगा है। अदालत ने पूछा है कि विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर कितने पद सृजित हैं। साथ ही वर्तमान में कितने पदों पर नियमित नियुक्ति की गई है।

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अदालत ने इसकी विस्तृत जानकारी 15 दिसंबर तक अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। इसको लेकर प्रार्थी ब्रह्मानंद साहू सहित अन्य 64 लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता चंचल जैन की ओर से बताया गया कि वर्ष 2017 से सभी लोग संविदा पर असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्त हुए।

लेकिन मार्च 2021 में राज्य सरकार ने फिर से असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है। इसमें पूर्व से कार्यरत लोगों को भी आवेदन देने का निर्देश दिया गया है। अधिवक्ता चंचल जैन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार संविदा पद पर नियुक्ति दोबारा संविदा से नहीं की जा सकती है।

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इसके अलावा संविदा पर बहाल असिस्टेंट प्रोफेसर को समान के बदले समान वेतन मिलनी चाहिए। लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें नियमित करने की बजाय फिर से संविदा के जरिए ही सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पर रोक लगाने की मांग की गई है।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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