- आईएएल झारखंड चैप्टर के सेमिनार में जुटे राज्यभर के वकील, ‘रांची डिक्लेरेशन 2026’ के तहत उठी एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग।
- एक्सआईएसएस सभागार में ‘संविधान की प्रस्तावना और नागरिक’ विषय पर राज्य स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन।
Ranchi News: “देश की न्याय व्यवस्था को बेहतर ढंग से संचालित करने में अधिवक्ताओं का योगदान अतुलनीय है। वे समाज के विवादों को सुलझाने और विधि व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस काम करते हैं। वकीलों के कल्याण के लिए वर्तमान हेमंत सरकार पूरी तरह संवेदनशील है। सरकार ने उनके लिए स्वास्थ्य बीमा सहित कई जनकल्याणकारी कार्यक्रम लागू किए हैं और भविष्य में भी उनके हितों की रक्षा के लिए नए कदम उठाए जाएंगे।” यह बातें राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने कहीं। वे रविवार को इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स (IAL) झारखंड चैप्टर और हॉफमैन लॉ एसोसिएट्स के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
कामिल बुल्के पथ (पुरुलिया रोड) स्थित एक्सआईएसएस (XISS) के सभागार में आयोजित इस सेमिनार का शुभारंभ सुबह 11 बजे दीप प्रज्वलन और संविधान की प्रस्तावना के पाठ के साथ हुआ। ‘भारतीय संविधान की प्रस्तावना और नागरिक’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में राज्य भर से आए वकीलों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
एआई और सोशल मीडिया के युग में भी प्रासंगिक है प्रस्तावना: पूर्व जस्टिस एसएन पाठक
झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश माननीय एसएन पाठक ने संविधान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसकी तुलना देश के वीर जवानों से की। उन्होंने कहा:
“संविधान देश की आजादी से लेकर आज तक आम लोगों के अधिकारों के लिए वैसे ही अडिग खड़ा है, जैसे सीमा पर हमारे जवान खड़े रहते हैं। आज के सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सिक्योरिटी के डिजिटल युग में भी संविधान की प्रस्तावना अपने मूल उद्देश्यों पर पूरी तरह खरी उतरी है।”
उन्होंने केंद्र-राज्य संबंधों के संदर्भ में ‘केशवानंद भारती केस’ का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रस्तावना कभी पुरानी नहीं हो सकती। कुछ खास वर्गों द्वारा इसे पुराना बताने की परिकल्पना पूरी तरह गलत है।
संविधान समाज को एकजुट रखने का सबसे बड़ा टूल: पूर्व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा
झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रत्नाकर भेंगरा ने कहा कि हमारा संविधान देश के सम्मान का प्रतीक है और यह समाज के सभी जाति, धर्म और संप्रदाय के लोगों की सुरक्षा की गारंटी देता है। जो संगठन इसके दायरे पर सवाल उठा रहे हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। समाज को एकजुट रखने का सबसे बड़ा माध्यम और टूल हमारा संविधान ही है।
संविधान आम आदमी के अधिकारों का सबसे बड़ा पैरोकार: एडवोकेट जनरल
कार्यक्रम के मुख्य वक्ताओं में शामिल राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) रोहितेश्य राय ने कहा कि हमारा संविधान पूरी तरह से आम आदमी के अधिकारों की वकालत करता है। देश के नामचीन वकीलों ने हमेशा आम नागरिकों के हक और हुकूक की रक्षा के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। हमारे नागरिक अधिकारों की संपूर्ण सुरक्षा संविधान की प्रस्तावना में ही समाहित है।

‘रांची डिक्लेरेशन 2026’: वकीलों के लिए उठीं महत्वपूर्ण मांगें
झारखंड स्टेट बार काउंसिल के सदस्य सह आईएएल के सचिव एडवोकेट एके रसीदी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए इसे ‘रांची डिक्लेरेशन 2026’ घोषित किया। उन्होंने संसद और विधानसभा से अविलंब ‘एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट’ पास कराने की पुरजोर मांग की। उन्होंने कहा कि:
- वकीलों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को रोकना न्याय की सुरक्षा के लिए अति आवश्यक है ताकि वे निडर होकर काम कर सकें।
- संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) भी वकीलों के योगदान को न्याय के बुनियादी सिद्धांत के रूप में अनुपालन करने पर जोर दे रहा है।
- जूनियर वकीलों को आर्थिक संरक्षण, सहयोग और सही मार्गदर्शन मिलना चाहिए।
- सीनियर वकीलों को बिना लाइसेंस सरेंडर किए पेंशन की व्यवस्था की जानी चाहिए।
क्या आदर्श सिर्फ पन्नों में सिमट कर रह जाएंगे?: संजय कुमार विद्रोही
रांची जिला बार एसोसिएशन के महासचिव संजय कुमार विद्रोही ने अपने ओजस्वी भाषण से व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज के दौर में शिष्टाचार, भ्रष्टाचार में तब्दील होता जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या हमारे आदर्श सिर्फ संविधान की पुस्तक के पन्नों में सिमट कर रह जाएंगे? क्या हम संविधान की मूल भावना को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सफल हुए हैं? उन्होंने वकालत को समाज हित में एक बेहतरीन प्रोफेशन के रूप में स्थापित करने के लिए न्याय, समता और बंधुत्व का दीप जलाने का आह्वान किया।
राज्यभर के अधिवक्ताओं का जुटाव और सम्मान
इस राज्य स्तरीय सेमिनार में रांची के अलावा हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर, मेदनीनगर, रामगढ़, गिरिडीह सहित पूरे झारखंड के अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जिलों से आए नवनिर्वाचित बार सदस्यों को सम्मानित भी किया गया। मंच का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन भी गरिमापूर्ण माहौल में संपन्न हुआ, जिसमें नागरिकों के अधिकार, वकीलों के कल्याण और न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने का सामूहिक संकल्प लिया गया।