Supreme Court News

सुप्रीम कोर्ट का फैसला, संदेह कितना भी मजबूत हो, सबूत नहीं बन सकता, जानिए पूरा मामला

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 21 Feb, 2021
1 min read • 1.2k views
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
supreme court of india
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा है कि संदेह कभी सुबूत की जगह नहीं ले सकता, चाहे यह कितना ही मजबूत क्यों न हो। अदालत ने जोर देकर कहा कि यथोचित संदेह से परे दोषी साबित होने तक किसी भी आरोपित को निर्दोष माना जाता है।

जस्टिस इंदिरा बनर्जी और हेमंत गुप्ता की अदालत ने उड़ीसा हाई कोर्ट के एक फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि किसी भी आरोपित के खिलाफ सुबूतों की कड़ी इतनी पूर्ण होनी चाहिए कि उसके खिलाफ आरोप को साबित किया जा सके।

उड़ीसा हाई कोर्ट ने बिजली का करंट देकर एक होमगार्ड की हत्या करने के दो आरोपितों को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। अदालत ने कहा कि यह इस न्यायालय की न्यायिक घोषणा द्वारा अच्छी तरह स्थापित है कि संदेह, चाहे यह मजबूत ही क्यों न हो, सुबूत की जगह नहीं ले सकता।

See also  आरक्षण मामलाः सुप्रीम कोर्ट ने रद की ज्यादा गरीबों को प्राथमिकता देने की अधिसूचना, कहा- पहचान का आधार सिर्फ आर्थिक नहीं हो सकता

इसे भी पढ़ेंः रिंकू शर्मा हत्याकांड में चार लोगों को दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार

गीतांजलि टाडू ने पुलिस से अपनी शिकायत में कहा था कि उनके पति बिजय कुमार टाडू चंदाबली थाने में तैनात थे। उनको बानाबिहारी महापात्र, उसके बेटे लूजा तथा अन्य ने कुछ जहरीला पदार्थ खिलाकर और फिर बिजली का करंट देकर मार डाला।

सुप्रीम ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि मौत बिजली के करंट से हुई लेकिन इस बारे में कोई निष्कर्षात्मक सबूत नहीं है कि यह हत्या का मामला है। पीठ ने कहा कि महज इस तथ्य से कि मृतक आरोपित के कमरे में पड़ा था।

प्रतिवादियों ने शिकायतकर्ता को सूचना दी कि उसका पति निष्क्रिय अवस्था में था तथा उसने आवाज लगाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, यह साबित नहीं हो जाता कि प्रतिवादियों ने उनकी हत्या की थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपितों का दोष साबित करने में विफल रहा और अदालत ने आरोपितों को बरी कर सही फैसला किया।

See also  सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी से पीड़िता की शादी करने की बात को नकारा, सीजेआई ने कहा- गलत रिपोर्टिंग हुई

अदालत ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य ऐसे होने चाहिए, जिन्हें साबित किया जा सके। सुबूतों की कड़ी ऐसी होनी चाहिए, जिनमें संदेह की कोई गुंजाइश न हो। पीठ ने कहा कि इस बात की काफी संभावना है कि आरोपितों ने शिकायतकर्ता के पति को शराब पिलाई हो, जैसा कि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर का मानना है और सोते समय वह दुर्घटनावश बिजली के तार के संपर्क में आ गया हो।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Devesh Ananad

Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

Leave a Comment