Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट ने यूनाइटेड किंगडम (यूके) की यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्प्टन में दाखिले के लिए चयनित मेधावी छात्र को स्वीकृति के बावजूद छात्रवृत्ति की राशि जारी नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जतायी है। जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने झारखंड स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल के कार्यकारी निदेशक को निर्देश दिया है कि छात्र को 39,76,655.20 रुपये की पूरी छात्रवृत्ति राशि पांच अक्तूबर तक हर हाल में जारी करें।
अदालत ने कहा कि राशि जारी नहीं होने की स्थिति में कार्यकारी निदेशक को छह अक्तूबर को अदालत में सशरीर उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा। रांची के कांके निवासी सनत झा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह निर्देश दिया।
प्रार्थी के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सनत झा का चयन यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्प्टन में तीन वर्षीय बीटेक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग (कंप्यूटर साइंस एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम) पाठ्यक्रम के लिए हुआ है। छात्र ने राज्य सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से नौ जुलाई 2024 को जारी संकल्प के तहत छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था।
छात्रवृत्ति स्वीकृत, फिर भी नहीं मिली राशि
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि छात्र की पात्रता पर विचार करने के बाद झारखंड स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल के कार्यकारी निदेशक ने नौ सितंबर को छात्रवृत्ति की स्वीकृति प्रदान की। इसी दिन छात्रवृत्ति की 39,76,655.20 रुपये की राशि जारी करने का पत्र भी जारी किया गया था। इसके बावजूद छात्र को अब तक राशि उपलब्ध नहीं करायी गयी।
अदालत को बताया गया कि विश्वविद्यालय में फीस जमा करने की अंतिम तिथि पहले 21 सितंबर निर्धारित थी। छात्र के अनुरोध पर इसे बढ़ाकर पांच अक्तूबर कर दिया गया है। छात्र लगातार संबंधित अधिकारियों से छात्रवृत्ति की राशि जारी करने का अनुरोध करता रहा, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। फीस जमा नहीं होने की स्थिति में उसका विदेश स्थित विश्वविद्यालय में दाखिला प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए उसे हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा।
कोर्ट ने कहा- यह गंभीर चिंता का विषय
अदालत ने आदेश में कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि संबंधित प्रतिवादी एक मेधावी छात्र के करियर के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील बना हुआ है। ऐसी असंवेदनशीलता न केवल छात्र के उज्ज्वल करियर को प्रभावित कर सकती है, बल्कि राज्य सरकार की उस कल्याणकारी नीति के उद्देश्य को भी विफल कर सकती है, जिसके तहत मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाना है।
अदालत ने तत्काल कोई कठोर आदेश पारित करने के बजाय संबंधित अधिकारी को एक और अवसर दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि पांच अक्तूबर तक छात्रवृत्ति की पूरी राशि छात्र के खाते में जारी कर इसकी सूचना छात्र और राज्य सरकार के अधिवक्ता को दी जाए।
राशि नहीं मिली तो छह अक्तूबर को कोर्ट में होगी पेशी
हाईकोर्ट ने कार्यकारी निदेशक को इस संबंध में अगली सुनवाई से पहले प्रति शपथ पत्र दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पांच अक्तूबर तक छात्रवृत्ति की राशि जारी नहीं की जाती है, तो झारखंड स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल के कार्यकारी निदेशक को छह अक्तूबर को सशरीर अदालत में उपस्थित होकर राशि जारी नहीं किए जाने का कारण बताना होगा।

