Ranchi News: रांची के अपर न्यायायुक्त-V की अदालत ने बिजली विभाग के एल्यूमिनियम तार चोरी करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में सोमवार को अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले के आरोपी जियारत अंसारी को साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया है। फैसला सुनाते हुए अदालत ने अभियोजन पक्ष की कार्यशैली पर गंभीर टिप्पणी की और कहा कि यह वस्तुतः पूरी तरह से ‘साक्ष्यहीन’ (नो एविडेंस) का मामला है।
गवाह पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा अभियोजन
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष को पर्याप्त अवसर दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद वह अदालत के समक्ष किसी भी महत्वपूर्ण गवाह को पेश करने में विफल रहा। स्थिति यह रही कि अभियोजन पक्ष न तो मामले के सूचक (शिकायतकर्ता), न ही जब्ती सूची (सीजर लिस्ट) के गवाहों और न ही किसी अन्य स्वतंत्र गवाह को कोर्ट में खड़ा कर सका। साक्ष्यों की इसी कड़ी के टूटने के कारण आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
क्या था मामला?
यह मामला चान्हो थाना कांड संख्या 52/2019 से जुड़ा हुआ था। पुलिस के दावों के मुताबिक, 10 मई 2019 को पुलिस गश्ती दल ने चेकिंग के दौरान एक पिकअप वैन को रोका था। तलाशी लेने पर वैन से करीब 15 क्विंटल एल्यूमिनियम तार के 23 बंडल बरामद किए गए थे। पुलिस का आरोप था कि ये सारे तार सरकारी खंभों से काटकर चोरी किए गए थे और इन्हें अवैध रूप से ले जाया जा रहा था। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान मौके से ही जियारत अंसारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम व चोरी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। हालांकि, अदालत में पुलिस अपने इन दावों को साबित करने के लिए कोई भी कानूनी सबूत या गवाह पेश नहीं कर सकी।

