Civil Court News

Breaking Court News: 8.86 एकड़ जमीन फर्जीवाड़ा मामले में हेमंत सोरेन को झटका, डिस्चार्ज याचिका खारिज

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 08 Jun, 2026
1 min read • 1.2k views
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
WhatsApp Image 2026 05 04 at 5.30.27 PM
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Ranchi News: Jharkhand के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित 8.86 एकड़ जमीन फर्जीवाड़ा और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। पीएमएलए की विशेष अदालत ने उनकी ओर से दायर डिस्चार्ज (मुक्ति) याचिका खारिज कर दी है। एजेसी-1 सह विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए) योगेश कुमार की अदालत ने सोमवार को अपना आदेश सुनाते हुए कहा कि मामले में उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपों पर विचार करने के लिए पर्याप्त है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 3 जून को आदेश सुरक्षित रख लिया था और 8 जून को फैसला सुनाया। मामला ईडी द्वारा दर्ज ईसीआईआर संख्या 06/2023 से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि बरियातू रोड स्थित 8.86 एकड़ भूमि को अवैध तरीके से कब्जे में रखने और उससे जुड़े दस्तावेजों में हेराफेरी करने के लिए एक संगठित भूमि सिंडिकेट सक्रिय था। जांच के दौरान राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के कब्जे से 17 मूल रजिस्टर और बड़ी संख्या में भूमि संबंधी दस्तावेज बरामद किए गए थे। जांच एजेंसी का दावा है कि इन्हीं दस्तावेजों से भूमि हड़पने और राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ के तथ्यों का खुलासा हुआ।

हेमंत सोरेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी थी कि कथित 8.86 एकड़ भूमि का अनुसूचित अपराध (शेड्यूल्ड ऑफेंस) से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। बचाव पक्ष ने कहा कि भूमि उनके नाम पर नहीं है, न ही यह साबित करने वाला कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य है कि वह जमीन उनके कब्जे में थी। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि ईडी द्वारा पेश कई गवाहों के बयान केवल सुनी-सुनाई बातों (हियरसे) पर आधारित हैं और उनसे किसी आपराधिक साजिश का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। वहीं ईडी ने अदालत में कहा कि डिस्चार्ज याचिका के माध्यम से आरोपी इस स्तर पर “मिनी ट्रायल” कराना चाहते हैं, जबकि आरोप गठन के चरण में अदालत को केवल यह देखना होता है कि उपलब्ध सामग्री से अपराध की प्रथम दृष्टया संभावना बनती है या नहीं। ईडी ने दावा किया कि जांच में ऐसे पर्याप्त तथ्य सामने आए हैं, जिनसे आरोपी की भूमिका की जांच और मुकदमे की सुनवाई आवश्यक हो जाती है। डिस्चार्ज याचिका खारिज होने के बाद अब मामले में आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके साथ ही हेमंत सोरेन समेत अन्य आरोपियों को ट्रायल का सामना करना पड़ेगा। यह मामला झारखंड की चर्चित भूमि घोटाला जांचों में से एक माना जाता है और इसकी सुनवाई पर राजनीतिक एवं कानूनी हलकों की नजर बनी हुई है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील सुश्री मीनाक्षी अरोड़ा, सीनियर एडवोकेट अभिर दत्त, एडवोकेट देबयान गंगोपाध्याय और प्रदीप चंद्र ने पक्ष रखा था। जबकि ईडी की ओर से एडवोकेट ज़ोहेब हुसैन एवं स्पेशल पीपी रमित सतेंद्र ने पक्ष रखा था।

See also  रेलवे अधिकारी रमेश चंद्र झा को बड़ी राहत

अदालत ने डिस्चार्ज याचिका खारिज करते हुए कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं:

  • अदालत ने कहा कि डिस्चार्ज के चरण में विस्तृत साक्ष्य परीक्षण (मिनी ट्रायल) नहीं किया जा सकता। इस स्तर पर केवल यह देखना होता है कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया (Prima Facie) मामला बनता है या नहीं। यदि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सामग्री है तो आरोप तय किए जा सकते हैं।
  • विशेष अदालत ने माना कि ईडी द्वारा प्रस्तुत सामग्री और गवाहों के बयानों से प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि 8.86 एकड़ जमीन पर हेमंत सोरेन के कब्जे, नियंत्रण और लाभकारी उपयोग (beneficial enjoyment) से संबंधित पर्याप्त परिस्थितिजन्य साक्ष्य मौजूद हैं। इनमें जमीन की जांच-परख, सत्यापन के निर्देश, भूमि के चारों ओर बाउंड्री वॉल निर्माण और “CMO URGENT PINTU” अंकित फाइल की बरामदगी जैसी बातें शामिल हैं।
  • अदालत ने संतोष मुंडा के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि वह लंबे समय तक उक्त जमीन पर केयरटेकर रहा और उसने हेमंत सोरेन तथा उनकी पत्नी को कई बार वहां आते देखा। न्यायालय ने कहा कि यह बयान इस बात का संकेत देता है कि आरोपी जमीन पर नियंत्रण का प्रयोग कर रहे थे।
  • अदालत ने यह भी कहा कि भानु प्रताप प्रसाद, अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू, उदय शंकर और अन्य अधिकारियों के बयानों से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि 8.86 एकड़ जमीन का सत्यापन हेमंत सोरेन के निर्देश पर कराया गया था।
  • न्यायालय ने माना कि धारा 50 पीएमएलए के तहत दर्ज बयान इस स्तर पर विचार योग्य और स्वीकार्य सामग्री हैं तथा इन्हें पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
  • अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोप तय करने के चरण में केवल इतना देखना है कि क्या आरोपी के खिलाफ अपराध की आशंका या प्रथम दृष्टया आधार मौजूद है। दोषी या निर्दोष होने का अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान साक्ष्य के परीक्षण के बाद ही होगा।
See also  Snake bite: पत्नी को कोबरा से डंसवाकर मारने वाले पति को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

इन्हीं आधारों पर अदालत ने माना कि हेमंत सोरेन के खिलाफ आगे सुनवाई और आरोप गठन के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं, इसलिए डिस्चार्ज याचिका खारिज की जाती है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
CourtNews Desk

CourtNews Desk

Bringing you the latest news and in-depth analysis from around the world.

Leave a Comment