Ranchi: झारखंड उच्च न्यायालय ने कोयला वाशरियों द्वारा राज्य की नदियों में छोड़े जा रहे प्रदूषित पानी के मुद्दे को गंभीरता से लिया है। न्यायालय ने इस संबंध में प्राप्त एक पत्र का स्वतः संज्ञान लिया है और इसे जनहित याचिका में परिवर्तित कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने 6 नवंबर को सुनवाई निर्धारित की है। न्यायालय ने राज्य के मुख्य सचिव, जल संसाधन विभाग के सचिव, सीसीएल पिपरवार खलारी के महाप्रबंधक और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को प्रतिवादी बनाया है।
मनोज कुमार नामक व्यक्ति ने अपने पत्र में कहा है कि कोयला वाशरियों से गंदा और रसायन युक्त पानी सीधे राज्य की विभिन्न नदियों में छोड़ा जा रहा है, जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है और पीने योग्य नहीं रह गया है। झारखंड उच्च न्यायालय ने पूर्व में नदी तटों से अतिक्रमण हटाने और नदियों से ठोस अपशिष्ट के रिसाव को रोकने के आदेश दिए थे, लेकिन संबंधित विभाग आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा है।

