Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ जस्टिस एस.एन. प्रसाद और जस्टिस ए.के. राय ने राज्य सरकार से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद कैदियों की सजा में छूट और रिहाई नीति को लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार को विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि इस संबंध में नीतिगत निर्णयों और अद्यतन प्रगति की जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से प्रस्तुत की जाएगी। इस मामले में हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को भी प्रतिवादी बनाया है और उन्हें भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
यह स्वतः संज्ञान सुप्रीम कोर्ट के 4 नवंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने देश के सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि वे अपनी-अपनी जेलों में कैदियों की सजा में छूट (remission) और रिहाई की नीतियों के क्रियान्वयन की समीक्षा करें और उसकी निगरानी रिपोर्ट 15 दिसंबर तक सुप्रीम कोर्ट को भेजें। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जेलों में बंद पात्र कैदियों के मामलों में क्या कार्रवाई की गई, और कौन-कौन से कदम लागू किए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी।