Ranchi: रांची के रेलवे न्यायिक दंडाधिकारी बिजय कुमार यादव की अदालत ने 5 अगस्त, मंगलवार को रेलवे टिकटों की जालसाजी कर धोखाधड़ी करने के आरोप में जेल में बंद आरोपी बीर बहादुर सहनी को दोषी करार देते हुए चार अलग-अलग धाराओं में दो-दो साल और एक-एक साल की सजा सुनाई। सभी सजाएं अलग-अलग चलेंगी। यानी आरोपी को कुल 6 साल की सजा काटनी होगी। अदालत ने उस पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह जुर्माना दक्षिण-पूर्व रेलवे को देना है। बिहार के मुजफ्फरपुर के निवासी बीर बहादुर सहनी लंबे समय से हटिया समेत देश के अन्य प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर सामान्य श्रेणी के टिकटों की जालसाजी कर भोले-भाले यात्रियों से ठगी कर रहा था।
रेलवे सुरक्षा बल हटिया और सीबीआई रांची की संयुक्त कार्रवाई में उसे 8 दिसंबर 2024 को हटिया स्टेशन के यूटीएस काउंटर के पास से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से 09 नकली टिकट, 70 माइक्रो रबर स्टांप, इंक पैड, टिकट काटने का उपकरण, मोबाइल, सिम कार्ड और आधार कार्ड बरामद किया गया। वह कम दूरी के स्टेशनों के टिकट लेकर लॉज में रबर स्टैंप, स्याही व अन्य उपकरणों से उन्हें जाली बनाता था। मामले की जाँच सब इंस्पेक्टर अलबीना केरकेट्टा ने की और आरोप सिद्ध होने पर अदालत ने यह सजा सुनाई। मामला रेलवे के राजस्व नुकसान और यात्रियों के साथ धोखाधड़ी से जुड़ा था। मामले की सुनवाई के दौरान एपीपी पंचानंद कुमार ने अदालत में 11 गवाहियाँ दर्ज कराईं। गिरफ्तारी के बाद से ही आरोपी जेल में है।

