Ranchi: सिविल कोर्ट रांची के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी बीसी समद की अदालत ने 18 अक्तूबर को देसी पिस्तौल बरामदगी मामले में ट्रायल फेस कर रहा आरोपी तमाड़ निवासी एनेम हसा पूर्ति को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रितांशु कुमार सिंह ने बहस के दौरान पुलिस गवाहों को तकनीकी आधार पर बरामदगी को गलत साबित कर दिया। जिसका लाभ आरोपी को मिला। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि “अभियोजन की कहानी कई बिंदुओं पर संदिग्ध है। सबूतों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं, अतः आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाता है।”
बता दें कि 29 फरवरी 2024 को अपराध निरोधक जांच के दौरान टीम ने तमाड़ थाना क्षेत्र के निर्मल होटल में बैठा आरोपी को दो नली पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था। घटना को लेकर तमाड़ थाना में कांड संख्या 21/2024 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मुकदमे के दौरान अभियोजन ने छह गवाहों की गवाही दर्ज कराई गई। जिनमें एएसआई अजय प्रताप, सूचक सुखदेव राज, सार्जेंट मेजर अनीश मोमित कुजूर, निरीक्षक मुकेश कुमार खरिता, जवान योगेंद्र गोप और प्रदीप कुमार जैना शामिल थे। सभी पुलिस या एसएसबी के अधिकारी थे, जबकि कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। जिरह के दौरान गवाहों के बयान में कई विरोधाभास और प्रक्रियागत त्रुटियां सामने आईं।
जिरह के दौरान गवाहों के बयान में कई विरोधाभास सामने आयाः
एएसआई अजय प्रताप ने स्वीकार किया कि उन्हें नहीं पता कि आरोपी को किसने गिरफ्तार किया। जब्त हथियार घटनास्थल पर सील नहीं किया गया। किसी ने भी अपनी या स्वतंत्र गवाहों की तलाशी नहीं दी। सार्जेंट मेजर अनीश मोमित कुजूर ने माना कि उनके पास हथियार परीक्षण की तकनीकी योग्यता नहीं है। अन्य गवाहों ने घटनास्थल की दिशा और दूरी को लेकर अलग-अलग बयान दिए। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने ही गवाहों के बयानों में संगति नहीं रख सका और प्रक्रियागत खामियों के कारण पूरी कहानी संदेह के घेरे में आ गई। इन परिस्थितियों में न्यायालय ने आरोपी एनेम हसा पूर्ति को सभी आरोपों से दोषमुक्त घोषित किया और आदेश दिया कि यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है, तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।

