Ranchi: सिविल कोर्ट रांची के अपर न्यायायुक्त -7 की अदालत ने बेरोजगार युवाओं को कृषि विभाग में नौकरी दिलाने का लालच देकर लाखों रुपए की ठगी मामले में नामजद एक महिला समेत 10 आरोपियों को अग्रिम राहत देने से इनकार किया है। जेल जाने की संभावना दिख रही है। दसों आरोपियों की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पश्चात अदालत ने खारिज कर दी। इससे आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई है। आरोपियों में लवजी ठाकुर, मुरारी यादव, अरुण कुमार श्रीवास्तव, मनीषा कुमारी, पंकज कुमार, मधुरेंद्र कुमार पाठक, अजय कुमार मसीह, गुड्डू कुमार, अभिषेक कुमार और श्रवण पंडित शामिल हैं। इसी मामले में एक आरोपी मनीष कुमार जेल में है। अदालत ने माना कि यह एक संगठित अपराध है, जो बेरोजगार युवाओं के साथ धोखाधड़ी और शोषण का गंभीर उदाहरण है। ठगी मामले को लेकर नामकुम थाना में कांड संख्या 209/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मामले के अनुसार, आर्यावर्त एसोसिएट नामक कंपनी के जरिए बेरोजगार युवाओं को कृषि विभाग में नौकरी दिलाने का लालच देकर लाखों रुपये ठगे गए।
न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देने से निष्पक्ष जांच प्रभावित होगी और समाज पर नकारात्मक असर पड़ेगा। शिकायतकर्ता वीर भगत सिंह सरदार ने आरोप लगाया कि उसकी बहन को नौकरी का झांसा दिया गया और फार्म भरने व नियुक्ति के लिए 31 हजार रुपये मांगे गए। बाद में कथित ट्रेनिंग के नाम पर दर्जनों युवाओं को एक हॉल में रखा गया, जहां उन्हें मनोविज्ञान पढ़ाया जा रहा था। विरोध करने पर पीड़ित को बंधक बनाकर धमकाया गया और झूठे मामले में फंसाने की बात कही गई। सीआईडी और नामकुम पुलिस की संयुक्त छापेमारी में कंपनी कार्यालय और विवाह भवन से कई दस्तावेज, लैपटॉप और फार्म बरामद हुए। सह-आरोपी मनीष कुमार ने भी बयान में सभी याचिकाकर्ताओं की संलिप्तता स्वीकार की।

