Ranchi: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा कक्षा 1 से 5 शिक्षक नियुक्ति के लिए 07 सितंबर 2025 को जारी संशोधित परिणाम अब विवादों में उलझ गया है। इस नए परिणाम से बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं, जो पहले 12 अगस्त 2025 को प्रकाशित परिणाम में चयनित थे, लेकिन संशोधित सूची में उनका नाम हटा दिया गया। इससे अभ्यर्थियों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। इसी विवाद को लेकर अभ्यर्थी सुदामा कुमार ने अधिवक्ता चंचल जैन के माध्यम से झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में कहा गया है कि आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश Govt. of NCT of Delhi & Others v. Pradeep Kumar & Others (Civil Appeal No. 8259 of 2019) का हवाला देकर उन्हें संशोधित परिणाम से बाहर कर दिया।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि उन्होंने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में किसी भी प्रकार की छूट का लाभ नहीं लिया और सामान्य मानकों के अनुसार 60 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने बीसी-2 आरक्षित वर्ग के अंतिम चयनित उम्मीदवार से भी ज्यादा अंक प्राप्त किए। इसके बावजूद, उन्हें न तो आरक्षित वर्ग और न ही अनारक्षित श्रेणी में शामिल किया गया। याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश उन अभ्यर्थियों पर लागू नहीं होता, जिन्होंने निर्धारित न्यूनतम 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। ऐसे में आयोग का निर्णय न केवल अनुचित बल्कि अन्यायपूर्ण भी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई होने की संभावना है। दूसरी ओर, बड़ी संख्या में प्रभावित अभ्यर्थियों ने इस कदम पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि आयोग की प्रक्रिया ने योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया है। इस विवाद के कारण शिक्षक भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर कानूनी पचड़े में फंसती दिख रही है।

