Ranchi/H Court: जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में आवेदन की तिथि के बाद का प्रमाणपत्र स्वीकार नहीं किए जाने को लेकर दायर 44 याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद झारखंड हाईकोर्ट की पूर्णपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले में कई हाईकोर्ट के अलग अलग फैसले होने के कारण इस मामले को हाईकोर्ट की पूर्णपीठ में भेजा गया था। गुरुवार को चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान, जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने सुनवाई की। जेपीएससी और जेएसएससी आवेदन के तिथि के बाद का जाति प्रमाण पत्र स्वीकार नहीं करने के खिलाफ याचिकाएं दायर की गयी हैं।
प्रार्थियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एक केस का हवाला देते हुए कहा गया कि आवेदन के बाद की तिथि का जारी किया गया जाति प्रमाणपत्र भी स्वीकार किया जा सकता है, क्योंकि जाति प्रमाणपत्र जन्म के आधार पर दी जाती है न कि समय के आधार पर। प्रार्थी जब जन्म से एससी, एसटी, ओबीसी या अन्य होते हैं, तो जाति प्रमाणपत्र की तिथि से कोई लेना देना नहीं होता है। इसलिए विज्ञापन जारी होने के बाद की तिथि से बने प्रमाणपत्र भी स्वीकार किया जाना चाहिए। झारखंड लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट के ही आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि विज्ञापन की तिथि में जो तिथि निर्धारित रहती है उस तिथि से पूर्व का जाति प्रमाणपत्र मान्य होगा। सुप्रीम कोर्ट के ही एक आदेश का हवाला देते हुए अदालत को बताया गया कि आदेश में स्पष्ट है कि जो विज्ञापन में फॉर्मेट दिया गया है उसी फॉर्मेट में ही जाति प्रमाणपत्र मान्य होगा।
प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिंह, मनोज टंडन, अमृतांश वत्स एवं अन्य अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष रखा। जबकि जेपीएससी और जेएसएससी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सुनील कुमार रोहिणी, महाधिवक्ता राजीव रंजन, संजय पिपरावाल और प्रिंस कुमार ने पक्ष रखा।