Ranchi: नाबालिग लड़कियों के गृह प्रेमाश्रय का माननीय मुख्य न्यायाधीश द्वारा किए गए आकस्मिक निरीक्षण के दौरान संस्थान की समग्र कार्यप्रणाली, सुरक्षा, स्वच्छता, भोजन और बच्चियों की भलाई से जुड़े सभी पहलुओं का गहन मूल्यांकन किया गया। निरीक्षण के दौरान माननीय मुख्य न्यायाधीश ने गृह में रह रही प्रत्येक बच्ची से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उनकी समस्याएँ, अनुभव तथा घर लौटने की इच्छा के बारे में जाना। अधिकांश बच्चियों ने घर जाने की इच्छा जताई, परंतु प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण वे अब तक नहीं जा पाई हैं। निरीक्षण में यह भी सामने आया कि कुछ बच्चियों की पहचान स्पष्ट नहीं है, जिससे परिजनों की खोज और परामर्श प्रक्रिया को और मजबूत करने की आवश्यकता है। भोजन, स्वच्छता और अन्य सुविधाएँ संतोषजनक पाई गईं। माननीय मुख्य न्यायाधीश ने बच्चियों के लिए तैयार भोजन का स्वाद लेकर गुणवत्ता की भी जाँच की। गृह की साफ-सफाई, सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए सुपरिटेंडेंट की सराहना की गई।

सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) ने विशेष आवश्यकता वाली बच्चियों को समुचित संस्थान में भेजने में आ रही कठिनाइयों को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा, क्योंकि राजधानी में ऐसी विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस पर माननीय मुख्य न्यायाधीश ने सचिव, DLSA को विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। माननीय मुख्य न्यायाधीश ने कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। उन्होंने सचिव, DLSA को महिला अधिकारियों की एक टीम गठित करने को कहा, जो प्रत्येक बच्ची से बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे। जिला बाल संरक्षण अधिकारी (DCPO) को निर्देश दिया गया कि पुनर्वास प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। जिन बच्चियों के अभिभावक उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें समयबद्ध तरीके से फॉस्टर केयर या अन्य उपयुक्त व्यवस्था में भेजा जाए।
उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि जब बच्ची और उसके माता-पिता दोनों घर लौटने को तैयार हैं, तो फिर जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाएँ क्यों थोप दी जा रही हैं। इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिया गया कि ऐसी स्थितियों में प्रक्रिया सरल और त्वरित हो। निरीक्षण के अंत में माननीय मुख्य न्यायाधीश ने बच्चियों को आश्वस्त किया कि वे फिर उनसे मिलने आएंगे। निरीक्षण के दौरान रजिस्ट्रार जनरल, जुवेनाइल जस्टिस समिति के सदस्य, सामाजिक सुरक्षा निदेशक, DCPO और उच्च न्यायालय रजिस्ट्री के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

