Ranchi: राज्य में हुए 77 करोड़ रुपए से अधिक के बहुचर्चित शराब घोटाले में मामले के अनुसंधान पदाधिकारी की लापरवाही सामने आई है। जिसका लाभ जेल में बंद आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को मंगलवार को मिला है। विनय चौबे की गिरफ्तारी के 91 दिन बाद भी एसीबी उनके खिलाफ(शराब घोटाला) में चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। मंगलवार को उनके वकील ने डिफॉल्ट बेल फाइल करते हुए जमानत की मांग की। सुनवाई पश्चात एसीबी की विशेष अदालत ने डिफॉल्ट बेल की अर्जी स्वीकार कर ली है। अर्थात् विनय चौबे शराब घोटाले मामले में जमानत मिल गई। उनको एसीबी टीम में तत्परता से 20 मई को युद्ध स्तर की तरह गिरफ्तार किया। उसी दिन अदालत में पेश किया गया।
जहां से कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में लेते हुए बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार भेज दिया गया था। तब वह न्यायिक हिरासत में हैं। हालांकि स्वास्थ्य कारणों से वह जेल की जगह रिम्स में इलाज करवाने पहुंचे। यह डिफॉल्ट बेल बीएनएसएस की धारा 187(3) के तहत मिला है। इससे यह साबित होता है कि अनुसंधान पदाधिकारी कितने नाकारा है। जो 90 दिनों की समय सीमा पर भी चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। अब यहां सवाल उठ रहा है कि विनय चौबे को झूठे केस में 90 दिन से अधिक जेल में रहे। अब तो यह आनेवाला समय ही बताएगा। आगे भी अगर चार्जशीट दाखिल नहीं कि गई तो अन्य आरोपियों को भी धीरे-धीरे बेल होना तय है।

