सबूतों के अभाव में अदालत ने दिया लाभ, सहआरोपी को पहले मिल चुकी है उम्रकैद
रांची। 25 साल पुराने रामचरण बेड़िया हत्याकांड में ट्रायल फेस कर रहे बिल्डर राकेश कुमार चौधरी को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। यह फैसला सिविल कोर्ट रांची के अपर न्यायायुक्त 8 की अदालत ने बुधवार को सुनाया। अभियोजन के अनुसार 28 अप्रैल 2001 को रामचरण बेड़िया को अभियुक्त शंकर बेड़िया ने बिल्डर राकेश चौधरी के बुलावे का बहाना बनाकर कार से ले गया था। इसके बाद रामचरण लापता हो गया। 14 मई 2001 को सिकिदिरी थाना क्षेत्र के फोरवे डैम के पास उसका कंकाल बरामद किया गया। चिकित्सकीय जांच में सिर पर गंभीर चोट से मौत की पुष्टि हुई थी। मामले में अभियोजन का आरोप था कि हत्या की साजिश में राकेश चौधरी की भूमिका रही है। हालांकि, अदालत ने सुनवाई के दौरान यह पाया कि राकेश चौधरी के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त व ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
गौरतलब है कि इसी मामले में सहआरोपी शंकर बेड़िया उर्फ चैतू बेड़िया को नवंबर 2024 में अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उस समय राकेश चौधरी की फाइल अलग कर दी गई थी और उसके खिलाफ सुनवाई जारी रखी गई थी।
अदालत ने कहा कि संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन साक्ष्यों की कड़ी राकेश चौधरी के खिलाफ पूरी नहीं हो पाई, इसलिए उसे बरी किया जाता है।

