Ranchi: रांची स्थित एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की अदालत ने माओवादी गतिविधियों में लिप्त दो आरोपियों—शीर्ष माओवादी कमांडर रवींद्र गंझू और उसके बड़े भाई कुंवर गंझू—की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। दोनों ही मामले गंभीर आरोपों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण सुर्खियों में हैं।
🔴 कुंवर गंझू की जमानत याचिका खारिज
कुंवर गंझू पर आरोप है कि वह जंगल में माओवादी ठिकानों पर अपने भाई रवींद्र गंझू से मुलाकात करता था और माओवादियों को रसद पहुंचाने में सहयोग करता था। 6 जनवरी 2020 से वह न्यायिक हिरासत में है। लातेहार के चंदवा थाना पुलिस ने उसे शिव मंदिर बुधबाजार के पास उस वक्त पकड़ा था, जब वह जबरन वसूली की गई 5 लाख रुपये की रकम का आदान-प्रदान कर रहा था। उसके पास से आपत्तिजनक माओवादी साहित्य भी बरामद किया गया था।
एनआईए के विशेष लोक अभियोजक (पीपी) ने अदालत को बताया कि आरोपी ने आतंकवादी गतिविधियों से अर्जित धन से कुंदो गांव में 10 डिसमिल जमीन खरीदी थी, जिसे जब्त किया जा चुका है। जमानत मिलने पर आरोपी के गवाहों को धमकाने, साक्ष्य नष्ट करने या छेड़छाड़ की आशंका जताई गई।
🔴 कमांडर रवींद्र गंझू को भी राहत नहीं
सीपीआई (माओवादी) के टॉप कमांडर रवींद्र गंझू उर्फ आक्रमण जी उर्फ नेताजी को भी एनआईए कोर्ट से जमानत नहीं मिली। वह चतरा जिले के टंडवा स्थित मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं से अवैध वसूली और फंडिंग के मामले में आरोपी है। एनआईए ने उसे 5 मई 2025 को रिमांड पर लिया था, जिसके बाद से वह जेल में बंद है।
जांच में सामने आया है कि वह सात साल तक फरार था और गिरफ्तारी के बाद उसे तीन मामलों में एनआईए ने रिमांड पर लिया। 9 जून को उसने जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने यह कहते हुए उसे खारिज कर दिया कि मामला बेहद गंभीर है और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है।

