Ranchi / Godda: झारखंड हाईकोर्ट ने गोड्डा जिले के बसंतराय थाना क्षेत्र से जुड़े एक आपराधिक मामले में सुनवाई करते हुए निचली अदालत द्वारा जारी उद्घोषणा (इश्तहार/Proclamation) के आदेश को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आरोपी को पेश होने के लिए समय और स्थान निर्धारित किए बिना जारी किया गया उद्घोषणा आदेश कानूनन अमान्य है। न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने सुनवाई करते हुए गोड्डा के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (Judicial Magistrate 1st Class) द्वारा 25 अप्रैल 2026 को पारित आदेश को रद्द कर दिया।
📌 क्या है पूरा मामला?
यह मामला गोड्डा जिले के बसंतराय थाना कांड संख्या 18/2026 से जुड़ा हुआ है। मामले के आरोपी अयान शेख उर्फ मोहम्मद शाकिर (उम्र 29 वर्ष, निवासी- बाघकोल, बसंतराय) के खिलाफ पुलिस की अर्जी पर गोड्डा कोर्ट ने:
- 25 अप्रैल 2026: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 84 के तहत फरार होने की स्थिति में उद्घोषणा (इश्तहार) जारी करने का आदेश दिया था।
- 18 मई 2026: BNSS की धारा 85 के तहत संपत्ति कुर्की से जुड़ा प्रक्रियात्मक आदेश जारी किया था।
आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दोनों आदेशों को चुनौती दी गई थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने 18 मई के आदेश पर राहत पाने की मांग को वापस ले लिया और केवल 25 अप्रैल 2026 के इश्तहार आदेश को ही चुनौती दी।
⚖️ हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जितेंद्र एस. सिंह ने दलील दी कि मजिस्ट्रेट ने धारा 84 के तहत उद्घोषणा जारी करते समय आरोपी को हाजिर होने के लिए किसी निश्चित समय या स्थान का उल्लेख आदेश में नहीं किया, जो कि कानून की अनिवार्य शर्त है। दूसरी ओर, राज्य सरकार की विशेष लोक अभियोजक प्रिया श्रेष्ठ ने इसका विरोध किया।
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी ने कहा:
- कानूनी अनिवार्यता का अभाव: यह स्थापित कानूनी सिद्धांत है कि जब भी अदालत BNSS की धारा 84 (पूर्व में CrPC की धारा 82) के तहत उद्घोषणा आदेश जारी करती है, तो आदेश में ही अभियुक्त के उपस्थित होने का निश्चित समय और स्थान स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए।
- प्रक्रियात्मक त्रुटि: गोड्डा के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा समय और स्थान तय किए बिना जारी किया गया आदेश कानून के अनिवार्य प्रावधानों के अनुकूल नहीं है और यह न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
📝 अंतिम आदेश
हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए गोड्डा कोर्ट के 25 अप्रैल 2026 के आदेश को निरस्त (Quash) कर दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने गोड्डा के न्यायिक दंडाधिकारी को कानून के तहत नियमानुसार और सही प्रक्रिया का पालन करते हुए पुनः नया आदेश पारित करने की छूट दी है।

