पूरे राज्य के एनआईए मामलों की सुनवाई का रहेगा अधिकार क्षेत्र, तीन अदालतों में होगा मामलों का बंटवारा
Ranchi News: झारखंड में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए रांची में दो और विशेष अदालतें गठित की गयी हैं। केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद न्यायायुक्त, रांची ने अपर न्यायायुक्त-17 संजीव झा और अपर न्यायायुक्त-20 अरविंद कुमार द्वितीय की अदालत को एनआईए के अनुसूचित अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत के रूप में नामित किया है। इन दोनों अदालतों का क्षेत्राधिकार पूरे झारखंड राज्य तक होगा। इससे एनआईए के मामलों की सुनवाई के लिए रांची में न्यायिक क्षमता बढ़ गयी है और लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन का रास्ता साफ हुआ है।
केंद्र सरकार ने 16 जुलाई 2026 को भारत के राजपत्र में अधिसूचना जारी कर रांची के अपर न्यायायुक्त-17 और अपर न्यायायुक्त-20 की अदालत को एनआईए अधिनियम, 2008 की धारा 11 के तहत विशेष अदालत के रूप में नामित किया था। झारखंड हाईकोर्ट के 16 सितंबर के पत्र और एनआईए के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (लीगल) के 7 सितंबर के पत्र के आधार पर न्यायिक आयुक्त कार्यालय ने दोनों अदालतों को अतिरिक्त विशेष अदालत के रूप में कार्य करने का आदेश दिया है।
अब तीन अदालतों में बंटेगा एनआईए का काम
नई व्यवस्था में रांची सिविल कोर्ट में एनआईए मामलों की सुनवाई के लिए अदालतों की भूमिका भी स्पष्ट की गयी है। आदेश के मुताबिक एजेसी-16 सह विशेष न्यायाधीश-1 (एनआईए) की अदालत में न्यायाधीश अभिमन्यु कुमार एनआईए मामलों के दाखिले और प्रारंभिक न्यायिक प्रक्रिया से संबंधित कार्य करेंगे। इसके अलावा एजेसी-17 और एजेसी-20 की अदालतें भी विशेष रूप से एनआईए मामलों की सुनवाई करेंगी।
इस व्यवस्था से एक ही अदालत पर एनआईए के सभी मामलों का दबाव नहीं रहेगा। मामलों का न्यायालयवार वितरण होने से गवाही, आरोप गठन, जिरह, दस्तावेजी साक्ष्य और अंतिम बहस जैसे चरणों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा। पुराने लंबित मामलों के साथ नये मामलों की सुनवाई भी समानांतर रूप से चलाने की संभावना बनेगी।
एक अदालत पर निर्भरता खत्म, समानांतर सुनवाई का रास्ता
अब तक एनआईए के मामलों की संख्या बढ़ने पर एक ही विशेष अदालत पर सुनवाई का अधिक दबाव पड़ सकता था। दो अतिरिक्त विशेष अदालतें मिलने से यह दबाव कम होगा। अलग-अलग मामलों की सुनवाई अलग अदालतों में होने से तारीखों का बेहतर प्रबंधन और लगातार सुनवाई संभव होगी। विशेष अदालतों में मामलों की संख्या के अनुसार उन्हें बांटने से सुनवाई की गति बढ़ सकती है।
एनआईए अधिनियम की धारा 11(9) के तहत विशेष न्यायाधीश को मामलों के वितरण की व्यवस्था करने का अधिकार है। आदेश में यह भी प्रावधान किया गया है कि विशेष अदालत के कार्य को सभी संबंधित न्यायाधीशों के बीच बांटा जा सकता है। किसी न्यायाधीश की अनुपस्थिति की स्थिति में जरूरी मामलों के निपटारे की व्यवस्था भी की जा सकेगी।
पूरे झारखंड के मामलों की सुनवाई रांची में
इन विशेष अदालतों का क्षेत्राधिकार पूरे झारखंड राज्य में होगा। यानी राज्य के किसी भी जिले में एनआईए द्वारा जांच किये गये अनुसूचित अपराधों से जुड़े मामले इन विशेष अदालतों के समक्ष चल सकते हैं। इससे अलग-अलग जिलों में एनआईए मामलों के लिए अलग न्यायिक व्यवस्था की आवश्यकता नहीं होगी।

