जमानत पर बाहर चल रहे 8 दोषियों की बेल रद्द कर भेजा गया जेल; 18 अगस्त को सजा पर होगी सुनवाई, टीपीसी कमांडर अकरमन जी की फाइल हुई अलग
Ranchi News: चतरा जिले के बहुचर्चित मगध और आम्रपाली कोयला परियोजना से जुड़े अवैध फंडिंग और लेवी वसूली मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। एनआईए के विशेष न्यायाधीश अभिमन्यु कुमार की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) के सक्रिय सदस्य बिंदुश्वर गंझू समेत कुल 12 अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। वहीं, अदालत ने साक्ष्य के अभाव में एक आरोपी अजीत कुमार ठाकुर को बरी कर दिया। अदालत ने दोषी ठहराए गए सभी अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया है। दोषियों की सजा की अवधि (Point of Sentence) तय करने के लिए अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 18 अगस्त 2026 निर्धारित की है।
टीपीसी के क्षेत्रीय कमांडर अकरमन जी की फाइल अलग
मामले में ट्रायल फेस कर रहे प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीपीसी (TPC) के क्षेत्रीय कमांडर अकरमन जी उर्फ रवींद्र गंझू की फाइल को अदालत ने अन्य आरोपियों से अलग (Split up) कर दिया है।
अदालत द्वारा दोषी पाए गए 12 अभियुक्त:
जमानत रद्द कर जेल भेजे गए 8 दोषी: फैसला आते ही अदालत ने जमानत पर बाहर चल रहे 8 अभियुक्तों की जमानत तुरंत रद्द कर दी और उन्हें हिरासत में लेकर बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होटवार जेल, रांची) भेज दिया:
- संजय जैन
- बिनोद कुमार गंझू
- सुभान मियां
- प्रदीप राम उर्फ प्रदीप वर्मा
- प्रेम विकास उर्फ मंटू सिंह
- बिंदेश्वर गंझू उर्फ बिंदू गंझू
- मुनेश गंझू
- बीरबल गंझू
पूर्व से ही जेल में बंद 4 दोषी: मामले में पूर्व से ही न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद निम्नलिखित 4 आरोपियों को भी अदालत ने दोषी ठहराया है: 9. भीखन गंझू उर्फ दीपक गंझू 10. अनिश्चय गंझू 11. मुकेश गंझू उर्फ मुनेश्वर गंझू 12. अमर कुमार भोक्ता उर्फ लल्लनजी उर्फ लक्ष्मण गंझू उर्फ कोहराम जी उर्फ इब्राहिम
लेवी वसूली और टीपीसी को आर्थिक मदद का गंभीर आरोप
मामले के आरोपों के अनुसार, टीपीसी संगठन से जुड़े लोग चतरा के मगध और आम्रपाली कोल क्षेत्र में काम करने वाले ठेकेदारों, ट्रांसपोर्टरों, डीओ (DO) धारकों और कोयला कारोबारियों से बड़े पैमाने पर लेवी (रंगदारी) वसूलते थे। लेवी की रकम नहीं देने पर कारोबारियों को जान से मारने की धमकी दी जाती थी। वसूली गई इस भारी-भरकम राशि को प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीपीसी को आर्थिक रूप से मजबूत करने और उग्रवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पहुंचाया जाता था।
टंडवा थाने से सुप्रीम कोर्ट तक: केस का पूरा बैकग्राउंड
- मामले की शुरुआत: इस वृहद टेरर फंडिंग नेटवर्क का खुलासा वर्ष 2016 में टंडवा थाना कांड संख्या 02/2016 के रूप में दर्ज प्राथमिकी से हुआ था।
- NIA को जांच: मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार के निर्देश पर 13 फरवरी 2018 को एनआईए ने इस केस (आरसी केस संख्या: SplNIA/3/2018) की जांच अपने हाथों में ली थी।