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Court News: लोन वसूली का मामला: पीएनबी के पक्ष में फैसला, कोर्ट ने बुटीक संचालक को 8.40 लाख चुकाने का दिया आदेश

CourtNews Desk
By CourtNews Desk On 21 Sep, 2026
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रोशपा टावर स्थित बुटीक संचालक ने लोन लेकर नहीं चुकाई थी राशि, कमर्शियल कोर्ट के पीओ रवि नारायण की अदालत ने सुनाया फैसला

Ranchi News: कचहरी रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से लिया गया लोन न चुकाने के एक मामले में कमर्शियल कोर्ट के पीओ (Presiding Officer) रवि नारायण की अदालत ने बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने मेसर्स स्टिच एंड स्टाइल बुटीक के प्रोपराइटर मो. सुहेल को ब्याज सहित कुल ₹8,40,566 (आठ लाख चालीस हजार पांच सौ छियासठ रुपये) बैंक को लौटाने का आदेश दिया है।

क्या था पूरा मामला? कचहरी रोड स्थित पीएनबी (पूर्व में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स) की शाखा से मेन रोड स्थित रोशपा टावर में ‘मेसर्स स्टिच एंड स्टाइल बुटीक’ चलाने वाले मो. सुहेल ने 15 मार्च 2018 को बुटीक एवं टेलरिंग दुकान के विस्तार के लिए ₹5.45 लाख का कैश क्रेडिट लोन लिया था। इसके बाद कोरोना काल में व्यवसायों को राहत देने के लिए लागू ‘जीईसीएल’ (GECL) योजना के तहत 25 जून 2021 को ₹45,500 तथा 28 अप्रैल 2022 को ₹1.60 लाख का वर्किंग कैपिटल टर्म लोन (WCTL) लिया गया।

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लगातार किस्तें न चुकाने के कारण 29 सितंबर 2023 को बैंक ने इन खातों को एनपीए (NPA) घोषित कर दिया। इसके बाद बैंक ने 27 अगस्त 2024 को लीगल नोटिस भेजा और आखिरकार 1 मई 2025 को अदालत में वसूली का वाद (C.S. No. 78/2025) दाखिल किया।

अदालत का फैसला और एकतरफा कार्रवाई मामले की सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से अधिवक्ता सुबोध नारायण प्रसाद ने पक्ष रखा और वरिष्ठ प्रबंधक जसवंत लाल (P.W.-1) की गवाही कराई। बैंक ने लोन आवेदन, स्वीकृति पत्र, हाइपोथिकेशन एग्रीमेंट और बैलेंस कन्फर्मेशन लेटर समेत सभी जरूरी वित्तीय दस्तावेज (Ext. 1 से Ext. 6/e) कोर्ट में पेश किए।

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दूसरी तरफ, समन और नोटिस भेजे जाने के बावजूद प्रतिवादी मो. सुहेल (निवासी: तंजीम नगर, हिंदपीढ़ी, रांची) कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ। इसके चलते अदालत ने 21 मई 2026 को प्रतिवादी के खिलाफ एकतरफा (Ex-parte) कार्रवाई करने का आदेश दिया।

अदालत ने अपने फैसले में माना कि बैंक का बकाया कानूनी रूप से वसूलने योग्य है और मामला परिसीमा अधिनियम (Limitation Act) की धारा 18 के तहत समय सीमा के भीतर दाखिल किया गया है। इसके बाद कोर्ट ने बैंक के दावे को सही मानते हुए 7.5% वार्षिक साधारण ब्याज दर के साथ पूरी राशि चुकाने का आदेश दिया।

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