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शराब नीतिः हाईकोर्ट ने बेवरेज कारपोरेशन की संपत्ति बचने पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया

Devesh Ananad
By Devesh Ananad On 28 Aug, 2021
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Jharkhand High Court
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Ranchi: Liquor Policy झारखंड हाईकोर्ट ने स्टेट वेबरेज कारपोरेशन की संपत्ति को बेचने के मामले में अगले आदेश तक यथास्थिति (स्टेट्स को) बनाए रखने का आदेश दिया है। शराब की थोक बिक्री की नई नियमावली पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने उक्त फैसला सुनाया है।

इस मामले की पूर्व में सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि कोर्ट के अंतिम आदेश से लाइसेंस की प्रक्रिया प्रभावित होगी, लेकिन लाइसेंस जारी करते समय इस शर्त का उल्लेख क्यों नहीं किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। इसी दौरान झारखंड स्टेट बेवरेज कारपोरेशन लिमिटेड की संपत्ति बेचे जाने का मुद्दा उठाया गया।

इस पर अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। करीब तीन घंटे सुनवाई दौरान वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार, अपराजिता भारद्वाज, कुमारी सुगंधा और तान्या सिंह ने अदालत को बताया कि झारखंड उत्पाद अधिनियम-1915 की धारा 20-22 और 38 के अनुसार लाइसेंस निर्गत करने के लिए सक्षम पदाधिकारी कलेक्टर होते हैं।

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लेकिन नई नियमावली में उक्त अधिकार उत्पाद आयुक्त को दे दिया गया है। अधिनियम की धारा-90 के अनुसार लाइसेंस निर्गत करने के लिए शर्तों का निर्धारण अथवा नियम बनाने का अधिकार बोर्ड आफ रेवन्यू को दिया गया है, लेकिन सरकार ने ही सभी नियम बना दिए हैं। ऐसे में नई नियमावली अवैध एवं गैरकानूनी है।

इसलिए अदालत इस मामले में उचित निर्णय पारित करे। वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने कहा कि इसको लेकर राज्य सरकार ने नौ जून 2021 को गजट प्रकाशन किया। इसमें विभाग ने नई नियमावली लागू करने की तिथि आठ अगस्त 2021 तय की थी।

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लेकिन नई नियमावली लागू होने से पूर्व ही 11 जून 2021 को शराब के थोक व्यवसाय के लिए लाइसेंस जारी करने का विज्ञापन जारी कर दिया जब यह मामला कोर्ट में उठाया गया तो विभाग ने 24 जून 2021 को अधिसूचना जारी कर नौ जून से ही नई नियमावली के लागू होने की बात कही। इसलिए उक्त नियमावली पर रोक लगाई जाए।

बता दें कि राज्य सरकार ने झारखंड मदिरा भंडारण एवं थोक बिक्री नियमावली-2021 बनाई है। झारखंड रिटेल लिकर वेंडर एसोसिएशन ने इसे गैरकानूनी घोषित करने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस पर वादी की ओर से बहस पूरी कर ली गई है। अब नौ सितंबर को सरकार की ओर से बहस की जाएगी।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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