JSSC CGL: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC-CGL) की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा सीजील (विज्ञापन संख्या 10/2023) को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई पूरी करने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सभी पक्षों की सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा।
सरकार ने परीक्षा रद्द करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि प्रश्नपत्र लीक, अभ्यर्थियों तक प्रश्न-उत्तर पहुंचने और जांच में सामने आई अनियमितताओं के कारण पूरी परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई थी। ऐसी स्थिति में पूरी परीक्षा को रद्द करना ही उचित निर्णय था।
अदालत में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि सीजीएल परीक्षा में केवल किसी एक स्तर पर गड़बड़ी नहीं हुई, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था में गंभीर स्तर पर सिस्टम फेलियर सामने आया। जिस एजेंसी को परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसके स्तर से प्रश्नपत्र के लीक होने की बात जांच में सामने आई है।
लीक प्रश्नपत्र और उत्तर अभ्यर्थियों तक पहुंचने का दावा
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच के दौरान ऐसे तथ्य और दस्तावेज सामने आए हैं, जिनसे प्रश्नपत्र लीक होने और उसके बाद प्रश्नों के उत्तर अभ्यर्थियों तक पहुंचाए जाने की बात सामने आती है।
सरकार के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों को नेपाल समेत अन्य स्थानों पर प्रश्नों के उत्तर याद कराने की बात भी जांच में सामने आई है। इससे परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता दोनों प्रभावित हुईं।
वरीय अधिवक्ता ने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की पूरी नियुक्ति प्रक्रिया जनता और अभ्यर्थियों के भरोसे पर टिकी होती है। यदि परीक्षा की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े हो जाएं, तो उसके आधार पर की जाने वाली नियुक्तियों पर भी भरोसा कायम रखना मुश्किल होगा।
दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करना मुश्किल
राज्य सरकार ने अदालत में यह भी दलील दी कि अब तक की जांच में परीक्षा में अनियमितता से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। उपलब्ध दस्तावेजों से परीक्षा में गड़बड़ी और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को बल मिलता है। ऐसी स्थिति में यह तय करना कठिन है कि किन अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से प्रश्नपत्र या उसके उत्तर मिले और कौन अभ्यर्थी पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से परीक्षा में शामिल हुए।
सरकार ने कहा कि इसी वजह से केवल कुछ अभ्यर्थियों की परीक्षा या परिणाम रद्द करने के बजाय पूरी परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया। राज्य मंत्रिमंडल ने भी प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होने की परिस्थितियों को देखते हुए परीक्षा रद्द करने का फैसला किया था।
ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को परीक्षा की जिम्मेदारी देने पर सवाल
मामले में हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने भी अदालत के समक्ष परीक्षा में व्यापक स्तर पर हुई गड़बड़ी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सीजीएल में व्यवस्थित स्तर पर विफलता हुई है। जिस एजेंसी को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी दी गई, उसे पहले ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। इसके बावजूद उसे परीक्षा आयोजित करने का काम दिया गया।
उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने के बाद उसका बड़े पैमाने पर अभ्यर्थियों के बीच प्रसार हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि परीक्षा की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस जांच के दौरान कई नए तथ्य सामने आए हैं।
अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद सामने आए नए तथ्य
हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में कथित किंगपिन अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। दलील दी गई कि परीक्षा में हुई गड़बड़ी का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर भी पड़ा, जो योग्यता के आधार पर चयन के हकदार थे, लेकिन अनुचित तरीके से परीक्षा प्रभावित होने के कारण उनका चयन नहीं हो सका।
आज जेपीएससी से जुड़ी परीक्षाओं पर सुनवाई
शुक्रवार को हाईकोर्ट में जेपीएससी की ओर से आयोजित विभिन्न परीक्षाओं को रद्द करने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई होगी। इनमें सीडीपीओ, परीक्षा, 11वीं से 13वीं झारखंड सिविल सेवा परीक्षा, फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा समेत अन्य परीक्षाएं शामिल हैं।

