Ranchi: झारखंड हाई कोर्ट में जेपीएससी (JPSC) के 11वीं से 13वीं परीक्षा, सीडीपीओ (CDPO) और फूड सेफ्टी आफिसर (FSO) की नियुक्ति रद करने के सरकार के आदेश के खिलाफ दाखिल कई याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों और जेपीएससी की ओर से बहस पूरी कर ली गई है। अब राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखा जाना है। अदालत ने इसके लिए 12 अक्टूबर को 2.15 बजे सुनवाई निर्धारित की है। इस दौरान हस्तक्षेपकर्ताओं को भी पक्ष रखने का मौका मिलेगा।
अभ्यर्थियों के हित में परीक्षा रद करने का निर्णय उचितः जेपीएससी
इस दौरान जेपीएससी की ओर से अदालत में कहा गया कि परीक्षा में सिस्टमैटिक अनियमितता हुई है। अनुसंधान में यह स्पष्ट हो गया है कि परीक्षा की स्वच्छता भंग हुई है। नियुक्ति में यह पता लगाना असंभव है कि कौन सफल अभ्यर्थी दोषी है और कौन निर्दोष। परीक्षा लेने वाले आयोग की पवित्रता और परीक्षा की स्वच्छता को देखते हुए और अभ्यर्थियों के हित में सरकार की ओर से परीक्षा रद करने का निर्णय लिया गया है, जो उचित है।
सरकार ने बताया कि CID के दस्तावेजों से साफ है कि नियुक्ति में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। परीक्षा में अनियमितता को देखते हुए सरकार को नियुक्ति रद्द करने का अधिकार है। अब मामले की सुनवाई सोमवार दोपहर 2.15 बजे होगी। मामले में हस्तक्षेपकर्ता की ओर से बहस की जाएगी।
सरकार को परीक्षा रद करने का अधिकार नहीं
सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने अदालत को बताया कि जेपीएससी, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी आफिसर की नियुक्ति में कोई अनियमितता नहीं और न ही रद करने की अधिसूचना के समय तक कोई प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामला 14वीं जेपीएससी में अनियमितता की शिकायत मिली थी। जिसकी जांच चल रही और सीआईडी ने जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी की थी।
वहां से मिले तथ्यों के आधार पर 11वीं से 13वीं में शामिल कुछ अभ्यरथियों को समन किया गया है। इस परीक्षा में टी़डीपीएल की कोई भूमिका नहीं थी। अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि इन तीनों परीक्षा को डीटीपीएल (TDPL) से जोड़ते हुए सरकार ने परीक्षा रद की है। जबकि इन परीक्षाओं के लगभग संपन्न होने के बाद जुलाई 2025 में परीक्षा आयोजित करने में TDPL शामिल हुआ था। उस दौरान इन परीक्षा में चयन प्रक्रिया का अंतिम चरण डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन चल रहा था।
मामले में कोई प्राथमिकी नहीं
JPSC 11वीं-13वीं, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी अफसर की नियुक्ति को लेकर कोई प्राथमिकी ( FIR ) भी नहीं हुआ, कोई समन भी नहीं हुआ। अब तक किसी की गिरफ्तारी भी नहीं हुई। इन परीक्षाओं में सफल अभ्यर्थियों के मामले कोई मनी ट्रेल भी सामने नहीं आई है, जिससे पता चले कि परीक्षा में पैसों का कोई लेनदेन हुआ है।
दोनों अधिवक्ताओं ने बताया कि यहां परीक्षा में बड़े पैमाने में गड़बड़ी का भी कोई आरोप नहीं है। CID जांच में भी अबतक उक्त तीनों परीक्षा में गड़बड़ी के कोई साक्ष्य नहीं है। केवल TDPL की संलिप्तता की आशंका का हवाला देते हुए परीक्षा रद्द की गई। सरकार ने जल्दबाजी और राजनीतिक दबाव में परीक्षा रद्द की है।
अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने कोर्ट को बताया कि सरकार के तरफ से उक्त तीनों परीक्षा में नियुक्ति रद्द करने का वाला नोटिफिकेशन असंवैधानिक है। क्योंकि राज्य सरकार के पास परीक्षा और विज्ञापन रद्द करने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार केवल जेएसएससी/ जेपीएससी के पास है। लेकिन जब परीक्षा सपन्न होने के बाद आयोग की ओर से नियुक्ति की अनुशंसा करने के बाद आयोग की भूमिका समाप्त हो जाती है। ऐसे में राज्य सरकार के पास सिर्फ नियुक्ति आदेश रद करने का अधिकार है, वह भी संविधान में दी गई प्रक्रिया को अपनाते हुए किया जा सकता है।
एक ही आधार पर कई परीक्षा नहीं रद कर सकते
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि सरकार एक साथ 22 एग्जाम को कैंसिल नहीं कर सकती है, क्योंकि सभी परीक्षाओं के अलग-अलग तथ्य है। सभी परीक्षाओं को एक साथ जोड़कर उसमें बड़े पैमाने पर अनियमितता बताना गुमराह करने वाला काम है।
11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा मामले में क्वेश्चन पेपर लीक का कोई मामला नहीं सामने आया है। सरकार इस परीक्षा को 14वीं सिविल सेवा परीक्षा से जोड़कर देख रही है और 11वीं से 13वीं जेपीएससी में भी अनियमितता का आरोप लगा रही है।
मामले में याचिकाकर्ता ने सरकार द्वारा सिविल सेवा परीक्षा-2023 (01/2024), फूड सेफ्टी ऑफिसर (18/2023) और सीडीपीओ (21/2023) नियुक्ति को रद्द करने को चुनौती दी गई है।

