Ranchi News: करीब 31 साल पुराने एक सड़क हादसे के मामले में झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अदालत ने दुमका के पत्रकार भानु प्रताप सिंह के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने ट्रिब्यूनल द्वारा पूर्व में तय मुआवजे की राशि को बढ़ाकर 14.10 लाख रुपये कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने आदेश दिया है कि इस राशि पर दावा याचिका (Title Claim Case No. 37/1995) दाखिल करने की तारीख से लेकर वास्तविक भुगतान होने तक 6% वार्षिक दर से ब्याज भी दिया जाएगा।
मामला वर्ष 1995 का है। हादसे के समय 28 वर्षीय भानु प्रताप सिंह प्रेस संवाददाता के रूप में काम कर रहे थे और सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी पास कर चुके थे। पुलिस जीप की टक्कर में उनके बाएं पैर की जांघ और टिबिया की हड्डी टूट गई थी। लंबे इलाज के दौरान वह करीब तीन साल तक बिस्तर पर रहे। मेडिकल बोर्ड ने 60 प्रतिशत से अधिक स्थायी शारीरिक दिव्यांगता प्रमाणित की थी। वर्तमान में भी उन्हें चलने के लिए बैसाखी का सहारा लेना पड़ता है।
दुमका के ट्रिब्यूनल ने 24 दिसंबर 2005 को 9.58 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ पुलिस अधीक्षक, दुमका ने हाईकोर्ट में अपील की थी। वहीं भानु प्रताप सिंह ने मुआवजा बढ़ाने के लिए 2025 में क्रॉस ऑब्जेक्शन दाखिल किया। हाईकोर्ट ने कार्यात्मक दिव्यांगता 70 प्रतिशत मानते हुए भविष्य की आय के नुकसान के लिए 5.99 लाख, चिकित्सा खर्च के लिए दो लाख, इलाज अवधि की आय के नुकसान के लिए 1.08 लाख समेत विभिन्न मदों में मुआवजा तय किया। राज्य सरकार को आठ सप्ताह में बढ़ी राशि जमा करने का निर्देश दिया गया है।