Ranchi News: जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि न्याय का उत्सव है, जहां लोगों को सुलभ, त्वरित और निःशुल्क न्याय मिलता है। शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा आयोजित दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं, मध्यस्थों और पीएलवी की भूमिका लंबित मामलों के निस्तारण में अत्यंत महत्वपूर्ण है। जागरूकता बढ़ेगी तो अधिक से अधिक मामलों का समाधान संभव होगा। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से वादकारियों का समय और धन दोनों बचते हैं तथा न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है। पारिवारिक विवादों में लंबित डिस्ट्रेस वारंट को कम करने पर भी उन्होंने जोर दिया।
इस अवसर पर व्यवहार न्यायालय परिसर में दीदी कैफे, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा, वल्नरेबल विटनेस डिपोजिशन सेंटर, प्रोटेक्टेड विटनेस रूम एवं क्यूआर कोड आधारित एप्लिकेशन सिस्टम का उद्घाटन भी किया गया। कार्यक्रम में अनिल कुमार मिश्रा, झालसा के सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना, न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता, मध्यस्थ एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। लोक अदालत में हजारों मामलों का निस्तारण कर करोड़ों रुपये का सेटलमेंट भी किया गया।
इस अवसर परन्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1, सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना, व्यवहार न्यायालय, रांची के सभी एजेसी, न्यायिक पदाधिकारीगण, न्यायिक दण्डाधिकारीगण,उपायुक्त रांची, मंजुनाथ भजंत्री, रांची एसपी राकेश रंजन, रूरल एसपी ग्रामीण गौरव गोस्वमी, प्रधान सचिव विधि विभाग श्री निरज कुमार श्रीवास्तव, निदेशक जुडिशियल एकेडेमी, ओ.एस.डी.-टू- गवर्नर श्री गति कृष्णा तिवारी, एसडीओ रांची, श्री कुमार रजत, डीजीएम एसबीआई, रिजनल ऑफिस रांची, मनोज कुमार, आरएम एसबीआई, रिजनल ऑफिस रांची राजीव कुमार, डीजेडएम रांची, ज्योति कुमार सिंह, डीआइओ रांची, एनआईसी रांची, एडीआईओ, रांची एनआईसी रांची, रांची जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, शम्भू प्रसाद अग्रवाल, महासचिव संजय कुमार विद्रोही, एलएडीसीएस के सदस्यगण, मध्यस्थ एवं अधिवक्तागण, कर्मचारीगण, पीएलवी समेत अन्य लोग उपस्थित थे।

राष्ट्रीय लोक अदालत में 22.92 लाख से अधिक मामलों का निस्तारण, 8.53 अरब रुपये से अधिक का हुआ सेटलमेंट
झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में 09 मई 2026 को आयोजित वर्ष की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में राज्यभर में रिकॉर्ड संख्या में मामलों का निस्तारण किया गया। लोक अदालत के माध्यम से कुल 22,92,849 प्री-लिटिगेशन मामलों तथा 1,55,340 लंबित मामलों का सफल निष्पादन हुआ। वहीं कुल 8,53,98,66,392 रुपये राशि से जुड़े मामलों का आपसी सहमति से समाधान कराया गया। इस दौरान झारखंड हाई कोर्ट विधिक सेवा समिति द्वारा उच्च न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में भी 18 लंबित मामलों का निस्तारण किया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से बैंक ऋण, मोटर दुर्घटना दावा, पारिवारिक विवाद, श्रम विवाद, बिजली-पानी बिल, चेक बाउंस सहित विभिन्न मामलों का त्वरित समाधान हुआ। इससे वादकारियों को कम समय और कम खर्च में न्याय मिलने के साथ न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम हुआ।

रांची में लगी लोक अदालत में 8.79 लाख से अधिक मामले निस्तारित
District Legal Services Authority द्वारा आयोजित वर्ष 2026 की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकॉर्ड संख्या में मामलों का निस्तारण किया गया। Sujit Narayan Prasad ने रांची न्यायमंडल से वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि लंबित वादों के निस्तारण में अधिवक्ताओं और मध्यस्थों की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने लोक अदालत को सुलभ, त्वरित और निःशुल्क न्याय का प्रभावी माध्यम बताया।
इस दौरान कुल 47,397 लंबित मामलों तथा 8,32,365 प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण किया गया। साथ ही 1,36,99,52,446.21 रुपये की राशि का सेटलमेंट हुआ। मोटर वाहन दुर्घटना मामलों में 36 पीड़ितों के बीच 20,06,40,672 रुपये मुआवजा राशि वितरित की गई। वहीं झारखंड पीड़ित मुआवजा योजना के तहत 24 पीड़ितों के बीच 82.80 लाख रुपये बांटे गए। श्रीमती गीता सिंह को अकेले 1.32 करोड़ रुपये का मुआवजा चेक प्रदान किया गया।

रांची व्यवहार न्यायालय में वल्नरेबल विटनेस डिपोजिशन सेंटर का उद्घाटन
Sujit Narayan Prasad ने शनिवार को Civil Court Ranchi परिसर में वल्नरेबल विटनेस डिपोजिशन सेंटर का उद्घाटन किया। इस केंद्र का उद्देश्य संवेदनशील गवाहों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों और उत्पीड़न पीड़ितों को सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण में बयान दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम के दौरान प्रोटेक्टेड विटनेस रूम और क्यूआर कोड आधारित एप्लिकेशन सिस्टम की भी शुरुआत की गई। इस अवसर पर Anil Kumar Mishra, सदस्य सचिव Ranjana Asthana समेत कई न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा कि न्याय प्रक्रिया को मानवीय और गवाह-अनुकूल बनाना समय की आवश्यकता है।