Ranchi/Hazaribag News: झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने 26 दिसंबर, शुक्रवार को हजारीबाग स्थित संप्रेक्षण गृह (बाल सुधार गृह) एवं लोक नायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह, पुलिस अधीक्षक अंजनी अंजन, झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (JHALSA) की सदस्य सचिव कुमारी रंजना आस्थान, सहित कई प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। निरीक्षण की शुरुआत संप्रेक्षण गृह से हुई, जहां माननीय न्यायाधीश ने पूरे परिसर का गहन अवलोकन किया। उन्होंने वहां निरुद्ध किशोरों से संवाद कर उन्हें उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। इस दौरान भोजन व्यवस्था, किशोर न्याय बोर्ड से संबंधित प्रक्रिया, पुस्तकालय, चिकित्सा कक्ष, परामर्श कक्ष, हॉस्टल, शौचालय, बिजली एवं सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। माननीय न्यायाधीश ने अधिकारियों को आवश्यक सुधारात्मक निर्देश भी दिए।

संप्रेक्षण गृह में किशोर कैदियों द्वारा योग एवं व्यायाम की प्रस्तुति दी गई, जिसे देखकर माननीय न्यायाधीश ने बच्चों की सराहना की और उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि सुधार गृहों का उद्देश्य बच्चों को सही मार्गदर्शन देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके बाद माननीय न्यायाधीश ने लोक नायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा का निरीक्षण किया। उन्होंने महिला वार्ड, अस्पताल वार्ड सहित अन्य विभागों का भ्रमण किया और कैदियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रत्येक कैदी को अपने मामले की विधिक स्थिति की जानकारी होना आवश्यक है। निरीक्षण के दौरान माननीय न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि केंद्रीय कारा में निरुद्ध सजायाफ्ता कैदियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के माध्यम से प्रभावी एवं निःशुल्क कानूनी सहायता अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने इसे कैदियों का संवैधानिक अधिकार बताते हुए डालसा को सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया। माननीय न्यायाधीश के इस निरीक्षण से सुधारात्मक व्यवस्था, पारदर्शिता तथा कैदियों के अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संदेश गया है।