ईडी कार्यालय की सुरक्षा अर्धसैनिक बल से कराने का निर्देश, एसएसपी रांची जिम्मेदार
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) रांची जोनल ऑफिस के दो अधिकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में बड़ा हस्तक्षेप करते हुए पुलिस जांच और आगे की पूरी कार्रवाई पर तत्काल रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार के गृह सचिव को निर्देश दिया है कि ईडी कार्यालय की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ, बीएसएफ या किसी अन्य अर्धसैनिक बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए। जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईडी कार्यालय परिसर में कोई भी अप्रिय घटना होती है तो उसकी सीधी जिम्मेदारी एसएसपी रांची की होगी। कोर्ट ने ईडी कार्यालय में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखने का भी सख्त निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।
‘मूक दर्शक नहीं बन सकती अदालत’
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में प्राथमिकी के शुरुआती चरण में अदालत हस्तक्षेप नहीं करती, लेकिन मौजूदा मामले में सामने आए तथ्यों को देखते हुए कोर्ट मूक दर्शक नहीं बन सकती। कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया यह मामला ईडी द्वारा की जा रही संवेदनशील मनी लॉन्ड्रिंग जांच को बाधित करने का प्रयास भी हो सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम की धारा 67 के तहत यदि ईडी अधिकारी सद्भावना में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं तो उन्हें विधिक संरक्षण प्राप्त है।
23 करोड़ के घोटाले के आरोपी से जुड़ा मामला
ईडी की ओर से अदालत को बताया गया कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से जुड़े करीब 23 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन के आरोपी संतोष कुमार 12 जनवरी को बिना किसी समन के स्वयं ईडी कार्यालय पहुंचा था। पूछताछ के दौरान उसने अचानक उग्र होकर पानी का जग उठाकर खुद के सिर पर मार लिया, जिससे उसे मामूली चोट आई। ईडी अधिकारियों ने तत्काल उसे सदर अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया। बाद में उसी व्यक्ति ने ईडी अधिकारियों पर मारपीट समेत गंभीर आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में प्राथमिकी दर्ज करा दी। इसके बाद रांची पुलिस की टीम ईडी कार्यालय पहुंच गई और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी, जिससे महत्वपूर्ण साक्ष्यों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
राज्य सरकार और शिकायतकर्ता से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने इस मामले में संतोष कुमार को औपचारिक रूप से प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया है। उनकी ओर से अधिवक्ता ने 10 दिनों का समय जवाब दाखिल करने के लिए मांगा है। वहीं राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया गया है। हाईकोर्ट के इस आदेश को ईडी अधिकारियों की सुरक्षा और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता के लिहाज से अहम माना जा रहा है।