Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की नदियों में कोल वाशरी से निकलने वाले प्रदूषित पानी के बहाव को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्टेट एनवायरमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA) के सदस्य सचिव को प्रतिवादी बनाते हुए शपथ पत्र के माध्यम से विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही मेसर्स मोनिट डेनियल्स कोल वाशरी प्राइवेट लिमिटेड, सीसीएल पिपरवार के महाप्रबंधक, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मुख्य सचिव, तथा जल संसाधन विभाग के सचिव सहित अन्य संबंधित विभागों को भी नोटिस जारी कर उत्तर मांगा गया है। मोनिट डेनियल्स कोल वाशरी की ओर से लगाए गए आरोपों पर शपथ पत्र दायर करने की अनुमति मांगी गई, जिसे खंडपीठ ने स्वीकार कर लिया। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर के लिए निर्धारित की है।
यह मामला खलारी, रांची निवासी आरटीआई कार्यकर्ता मनोज कुमार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित है, जिसे हाईकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) में बदल दिया। पत्र में आरोप लगाया गया था कि कोल वाशरियों से निकलने वाला दूषित पानी नदियों में छोड़ा जा रहा है, जिससे जल गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है। साथ ही यह भी उल्लेख था कि हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में नदी किनारे अतिक्रमण हटाने और नदियों में कचरा डालने पर रोक का आदेश दिया गया था, परंतु इन आदेशों का पालन प्रभावी तरीके से नहीं हो रहा है।