Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने सहायक आचार्य परीक्षा (Assistant Professor Exam) को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए 2 वर्षीय B.Ed कोर्स करने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल करने का निर्देश दिया है। यह फैसला उन उम्मीदवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जिन्हें JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) ने एक वर्षीय B.Ed को ही मान्यता प्राप्त मानते हुए चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया था।
क्या था मामला?
झारखंड में सहायक आचार्य की नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया के दौरान, JSSC ने केवल एक वर्षीय B.Ed डिग्री को स्वीकार्य माना, जिसके चलते 2 वर्षीय नियमित B.Ed डिग्री रखने वाले दर्जनों अभ्यर्थियों को प्रमाण पत्र सत्यापन के समय अयोग्य करार दिया गया। इस फैसले को चुनौती देते हुए विप्लव दत्त समेत कई अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार और अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि:
“NCTE (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) की नवीनतम गाइडलाइन के अनुसार पूरे देश में अब 2 वर्षीय B.Ed कोर्स ही मान्य है। ऐसे में उम्मीदवारों को केवल इस आधार पर चयन से बाहर करना गैरकानूनी और अन्यायपूर्ण है।”
अदालत की सुनवाई और आदेश
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ में हुई। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपने आदेश में कहा कि:
“जिन उम्मीदवारों ने 2 वर्षीय B.Ed कोर्स किया है, उन्हें केवल इस आधार पर परीक्षा से बाहर नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह कोर्स NCTE द्वारा मान्य है।”
अदालत ने JSSC को निर्देश दिया कि ऐसे सभी अभ्यर्थियों को सहायक आचार्य परीक्षा में शामिल होने दिया जाए, जिन्हें सिर्फ B.Ed की अवधि के आधार पर अयोग्य ठहराया गया था।

