DGP News: झारखंड के डीजीपी नियुक्ति नियमावली को सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया डीजीपी नियुक्ति को लेकर प्रकाश सिंह मामले में तय कानून के विपरित बताया है। अदालत ने डीजीपी तदाशा मिश्रा को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने झारखंड में डीजीपी नियुक्ति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय नियमों के अनुरूप नहीं हुई।
झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने केंद्र की अर्जी पर आपत्ति जताई और कहा कि अमिकस क्यूरी पहले ही इस मामले में अपने सुझाव दे चुके हैं।
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि झारखंड का डीजीपी नियुक्ति नियम नियुक्ति के मामले में अलग है। उन्होंने कहा कि फिलहाल सुनवाई को इसी मुद्दे तक सीमित रखा जा सकता है और दूसरे मुद्दों पर व्यापक स्तर पर बाद में विचार किया जाएगा।
छह महीने से कम सेवा वाले अधिकारी को डीजीपी बनाने का प्रावधान
केंद्र सरकार ने झारखंड में डीजीपी नियुक्ति नियमावली पर सवाल उठाया है। जिसके तहत किसी अधिकारी को सेवानिवृत्ति से छह महीने से कम समय बाकी होने के बावजूद डीजीपी पद पर नियुक्ति के लिए पात्र माना जा सकता है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि झारखंड सरकार ने पुलिस एक्ट, 1861 की धारा 46 को धारा 2 के साथ पढ़ते हुए 2025 में डीजीपी नियुक्ति से संबंधित नियम बनाए हैं। इस नियम के तहत किसी अधिकारी की सेवानिवृत्ति से पहले छह महीने से कम की शेष सेवा होने पर भी उसे डीजीपी नियुक्ति के लिए योग्य माना गया है। पीठ ने कहा कि यह प्रावधान प्रथम दृष्टया सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में दिए गए कानून के सीधे विपरीत दिखाई देता है।
तदाशा मिश्रा को सुनवाई का मौका
कोर्ट ने कहा कि यदि इस नियम को रद्द किया जाता है तो उसके आधार पर हुई तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना जरूरी है।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि तदाशा मिश्रा की नियुक्ति से उनके पक्ष में एक अधिकार पैदा हो चुका है। ऐसे में नियम को रद्द करने से उनकी नियुक्ति प्रभावित होती है तो उन्हें सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।
कोर्ट ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया कि वह तदाशा मिश्रा को नोटिस जारी करे, ताकि वह अदालत के समक्ष उपस्थित होकर मामले में अपना पक्ष रख सकें। साथ ही अदालत ने झारखंड सरकार को इस विवादित नियम पर दोबारा विचार करने की स्वतंत्रता दी है।
कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि नियम को भविष्य के लिए रद्द किया जाता है तो उसके प्रभाव को लेकर अलग तरीके से विचार किया जा सकता है।
दूसरे राज्यों के डीजीपी नियुक्ति नियम भी जांचे जाएंगे
सुनवाई के दौरान अमिकस क्यूरी ने कहा कि झारखंड के डीजीपी नियुक्ति नियम में एक विशेष प्रावधान है और वह इसी मुद्दे पर अदालत को विस्तार से संबोधित करना चाहते हैं। इस पर कोर्ट ने अमिकस क्यूरी को दूसरे राज्यों द्वारा डीजीपी की नियुक्ति से संबंधित बनाए गए कानूनों, नियमों और विनियमों की भी जांच करने को कहा। उन्हें इन नियमों के आधार पर दूसरे राज्यों में हुई नियुक्तियों के परिणामों को भी देखने का निर्देश दिया गया है।

