विधिक पहल: माननीय न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन और डालसा सचिव राकेश रौशन की मौजूदगी में हुआ आयोजन
सख्त संदेश: वक्ताओं ने कहा— फोन कॉल या मैसेज के प्रलोभन में न आएं, कोई भी लिंक खोलने से पहले सौ बार सोचें
- हैक हो रहा इंसान का दिमाग: बैंक ऑफ महाराष्ट्र के उप-अंचल प्रबंधक ने चेताया— अब अपराधी हथियार लेकर नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यमों से आते हैं।
- न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति: कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश, सीजेएम, रजिस्ट्रार, मध्यस्थ, पैनल लॉयर्स और एलएडीसीएस के सदस्य रहे मौजूद।
Ranchi News: रांची जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के सहयोग से समन्वय स्थापित कर व्यवहार न्यायालय परिसर में साइबर सुरक्षा पर एक दिवसीय वृहद जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। माननीय न्यायायुक्त, रांची श्री अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन तथा डालसा सचिव श्री राकेश रौशन की गरिमामयी मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। मंच का संचालन बैंक ऑफ महाराष्ट्र के प्रबंधक राजा साव ने किया।
डिजिटल खतरों को पहचानना पहली जरूरत: न्यायायुक्त
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि माननीय न्यायायुक्त श्री अनिल कुमार मिश्रा-1 ने कहा कि साइबर सुरक्षा जागरूकता का असली अर्थ डिजिटल दुनिया में होने वाले खतरों को समझना और अपने डेटा को सुरक्षित रखना है। आज इंटरनेट हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है, जिसके कारण ऑनलाइन धोखाधड़ी का जोखिम भी काफी बढ़ा है। उन्होंने रेखांकित किया कि सजग रहने के लिए सबसे पहले हमें प्रमुख डिजिटल खतरों को पहचानना होगा। ईमेल, लॉटरी या मैसेज भेजकर बैंक डिटेल्स व पासवर्ड चुराने वाले शातिरों पर कड़ी नजर रखनी होगी। अब गांव-घर के आम लोग भी जागरूक होकर इन अपराधियों को मात देंगे।

वर्षों की जमा-पूंजी स्वाहा कर रहे अपराधी
बैंक ऑफ महाराष्ट्र के उप-अंचल प्रबंधक श्री अभय कुमार दुबे ने कहा कि वर्तमान दौर में लगभग सभी कार्य ऑनलाइन हो गए हैं। पहले अपराधी हथियार लेकर सामने आते थे, लेकिन अब वे ईमेल, मैसेज और अन्य डिजिटल माध्यमों से अदृश्य होकर वार करते हैं। वे भ्रामक कॉल के माध्यम से ‘मानव मन’ को हैक करते हैं और प्रलोभन देकर लोगों की वर्षों की गाढ़ी कमाई को पल भर में स्वाहा कर देते हैं। उन्होंने नकली वेबसाइटों से बचने और किसी भी अनजान लिंक को ओपन करने से पहले पूरी तरह सोच-समझ लेने की सलाह दी।
सीआईडी डीएसपी ने समझाए साइबर फ्रॉड के नए ट्रेंड्स
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल सीआईडी की डीएसपी नेहाबाला सिंह ने उपस्थित न्यायिक पदाधिकारियों, कर्मचारियों और आम लोगों को साइबर फ्रॉड से बचने के व्यावहारिक तरीके बताए। उन्होंने वर्तमान में चल रहे नए साइबर अपराधों की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया:
- डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest): पुलिस या जांच एजेंसी का डर दिखाकर लोगों को ऑनलाइन बंधक बनाने का नया ट्रेंड।
- सीनियर सिटीजन स्कैम (Senior Citizen Scams): बुजुर्गों को निशाना बनाकर उनके बैंक खातों और पेंशन की राशि उड़ाना।
- स्टॉक इन्वेस्टमेंट फ्रॉड (Stock Investment Fraud): शेयर बाजार में कम समय में दोगुना मुनाफा कमाने का लालच देकर करोड़ों की ठगी।
- साइबर स्लेवरी व ह्यूमन ट्रैफिकिंग: युवाओं को विदेशों में नौकरी का झांसा देकर साइबर क्राइम सिंडिकेट में धकेलना।
- I4C गाइडलाइंस: उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के सुरक्षा मानकों की जानकारी दी।
बैंक और डालसा के अधिकारी रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता कार्यक्रम में कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश, अतिरिक्त न्यायाधीश, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM), व्यवहार न्यायालय के निबंधक (Registrar), न्यायिक दंडाधिकारीगण, पीएलवी, बैंक ऑफ महाराष्ट्र के मुख्य प्रबंधक राज राम मोहन राय, प्रबंधक सनोवर खां, सुभाष रवि, उप-प्रबंधक (विधि विभाग) ऋतिक और वरिष्ठ प्रबंधक अतुल रंजन सहित बड़ी संख्या में अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।

