Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी कर्मचारी की सेवा की पुष्टि (कन्फर्मेशन) केवल इस आधार पर अनिश्चितकाल तक नहीं रोकी जा सकती कि उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित है, खासकर तब जब मामले के लंबित रहने में कर्मचारी की कोई भूमिका नहीं हो। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने सेवानिवृत्त आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमरेश्वर प्रसाद की याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को उनकी सेवा की पुष्टि करने और सभी परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया है। डॉ. अमरेश्वर प्रसाद की नियुक्ति 23 जून 1980 को होम्योपैथिक चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में हुई थी। उन्हें प्रथम और द्वितीय एसीपी का लाभ भी मिल चुका था तथा वर्ष 2008 में विभागीय परीक्षा से छूट भी प्रदान की गई थी। इसके बावजूद उनकी सेवा की पुष्टि नहीं की गई।
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2009 से उनके खिलाफ एक निगरानी मामला लंबित है, इसलिए सेवा पुष्टि का मामला रोका गया है। हालांकि अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता करीब तीन दशक तक सेवा दे चुके हैं, विभागीय कार्यवाही में उन्हें दोषमुक्त किया जा चुका है और उन्हें पेंशन का लाभ भी दिया जा रहा है। अदालत ने कहा कि लंबे समय से लंबित आपराधिक मामले के कारण कर्मचारी को अनिश्चितकाल तक वंचित नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के के.वी. जंकीरमन मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मात्र लंबित आपराधिक जांच या मुकदमा सेवा लाभ रोकने का आधार नहीं बन सकता। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को डॉ. प्रसाद की सेवा को पुष्टि मानते हुए डीएसीपी समेत सभी देय लाभ देने तथा 16 सप्ताह के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।