Ranchi news: झारखंड हाईकोर्ट ने लोहरदगा में हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गुलाम गौश अंसारी को राहत दी है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद उसकी सजा को निलंबित करते हुए नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने उसे 10 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा करने का निर्देश दिया।
पीड़ित के घर जाने से मास्टर माइंड नहीं
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि घटना वाले दिन दोपहर में पीड़ित के घर जाना या किसी सह-आरोपी से फोन पर बातचीत होना मात्र इस आधार पर किसी व्यक्ति को हत्या की साजिश का मास्टरमाइंड साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने मामले में पेश किए गए साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड समेत अन्य तथ्यों की समीक्षा की।
पीड़ित ने बताएं थे हमला करने वाले का नाम
खंडपीठ ने पाया कि घटना के बाद जब पीड़ित गंभीर हालत में था और होश में था, तब उसने अपने परिजनों को हमलावरों के नाम बताए थे। उसके बयान में मुख्य शूटर समेत अन्य आरोपियों का उल्लेख किया गया, लेकिन गुलाम गौश का नाम नहीं था। अदालत ने इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना।
बाइक की बरामदगी पर भी उठे सवाल
मामले में पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल बाइक की बरामदगी का दावा किया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी बाइक के मालिकाना हक और उसकी बरामदगी को विश्वसनीय तरीके से साबित नहीं कर सके। अदालत ने पुलिस के इस दावे को भी साक्ष्यों के आधार पर परखा।
लोहरदगा की घटना
मामला वर्ष 2017 का है। लोहरदगा जिले के कुड़ू थाना क्षेत्र में धान खरीदने के बहाने एक युवक को नदी किनारे ले जाया गया था। वहां उसे गोली मार दी गई थी। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
वर्ष 2020 में निचली अदालत ने मामले में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान गुलाम गौश की भूमिका से जुड़े साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों की समीक्षा की गई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसकी सजा को निलंबित करते हुए नियमित जमानत देने का आदेश दिया।

