– जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने खारिज करने वाले विभागीय आदेश को किया रद्द – 10 साल से अधिक लगातार सेवा और स्वीकृत पद होने के आधार पर मिला फैसला, 6 सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करने का आदेश
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट से स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरिंग सेल में वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने 10 वर्षों से अधिक समय से सेवा दे रहे नौ संविदाकर्मियों की सेवाओं को नियमित (Regularize) करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने विभाग द्वारा 14 अगस्त 2024 को उनकी नियमितीकरण की मांग को खारिज करने से जुड़े विभागीय आदेशों को निरस्त करते हुए सभी नौ कर्मचारियों को सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग को निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से छह सप्ताह के भीतर इन सभी कर्मियों की सेवा बहाली और औपचारिक नियमितीकरण (Formal Regularization) की प्रक्रिया पूरी की जाए।
किन कर्मचारियों को मिला लाभ?
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा। कोर्ट के इस आदेश से लाभान्वित होने वाले कर्मचारियों में शामिल हैं:
धरो उरांव
अरुण कुमार साहू
गौतम प्रसाद सिंह
आशीष रंजन
प्रदीप बड़ा
विष्णु देव शाह
अरविंद कुमार सिंह
अजय कुमार रजक
संतोष कुमार राम
ये सभी कर्मचारी क्लर्क, ड्राइवर, टाइपिस्ट, ऑफिस असिस्टेंट और पंप ऑपरेटर जैसे स्वीकृत पदों पर संविदा के आधार पर कार्यरत थे।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां:
10 साल की निर्बाध सेवा: हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि याचिकाकर्ताओं ने 10 वर्ष से भी अधिक समय तक लगातार और बिना किसी ब्रेक के सेवा दी है।
स्वीकृत पद पर कार्यरत: अदालत ने माना कि ये सभी कर्मी स्वीकृत पदों (Sanctioned Posts) पर कार्यरत थे। ऐसी स्थिति में केवल ‘संविदा कर्मचारी’ होने का हवाला देकर उनकी सेवा समाप्त करना या उन्हें नियमितीकरण के लाभ से वंचित रखना कानूनन अनुचित है।
क्या था पूरा मामला?
इन सभी याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति वर्ष 2004 से 2008 के बीच स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियरिंग सेल में संविदा पर सपोर्ट स्टाफ के रूप में हुई थी। विभागीय समिति की अनुशंसा पर समय-समय पर उनकी संविदा अवधि बढ़ाई जाती रही और जनवरी 2017 तक उन्हें निर्धारित मानदेय व भत्तों का भुगतान भी किया गया।
इसके बाद बिना कोई औपचारिक सेवा समाप्ति आदेश (Formal Termination Order) जारी किए या बिना कोई स्पष्ट कारण बताए उन्हें काम करने से रोक दिया गया। इसके खिलाफ कर्मचारियों ने विभाग के समक्ष सेवा बहाली और नियमितीकरण की गुहार लगाई। 14 अगस्त 2024 को जब विभाग ने उनका आवेदन खारिज कर दिया, तब उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद विभागीय आदेश को पूरी तरह खारिज करते हुए कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया।

