JPSC News: झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी की 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) और फूड सेफ्टी अफसर की नियुक्ति रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने प्रार्थियों और राज्य सरकार को संक्षिप्त लिखित पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। सरकार की ओर से सोमवार को अदालत में अब तक की जांच की सीलबंद रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।
सुनवाई के दौरान हस्तक्षेरपकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा और सीडीपीओ परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल ने कथित तौर पर 50-50 लाख रुपये लेकर कई अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफल कराया।
जेपीएससी ने माना था कि परीक्षा में हुई थी व्यवस्थित गड़बड़ी
इस मामले की पिछली सुनवाई में जेपीएससी की ओर से कहा गया था कि परीक्षाओं में व्यवस्थित तरीके से अनियमितताएं हुई हैं। अनुसंधान में यह स्पष्ट हुआ है कि परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई थी। नियुक्ति प्रक्रिया में यह पता लगाना मुश्किल है कि सफल अभ्यर्थियों में कौन दोषी है और कौन निर्दोष।
जेपीएससी की ओर से अदालत को बताया गया था कि सीआईडी के दस्तावेजों से नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। परीक्षा में अनियमितताओं को देखते हुए राज्य सरकार को नियुक्तियां रद्द करने का अधिकार है।
तीन नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द करने के आदेश को दी गई है चुनौती
याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत सिविल सेवा परीक्षा-2023 (विज्ञापन संख्या 01/2024), फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति (विज्ञापन संख्या 18/2023) और सीडीपीओ नियुक्ति (विज्ञापन संख्या 21/2023) की प्रक्रिया रद्द की गई है।

