Ranchi News: एसीबी (Anti-Corruption Bureau) के विशेष न्यायाधीश ओंकार नाथ चौधरी की अदालत ने 24 साल पुराने एक रिश्वत मामले में गुमला अंचल के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी भानु प्रताप प्रसाद को दोषी करार देते हुए 1 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, अदालत ने उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मामले का विवरण (निगरानी थाना कांड संख्या 47/2002):
रिश्वत की मांग: अभियुक्त भानु प्रताप प्रसाद पर 89 डिसमिल जमीन का दाखिल-खारिज (Mutation) करने के एवज में 700 रुपये घूस मांगने का आरोप था।
शिकायत और एसीबी की ट्रैप कार्रवाई: इस मामले की शिकायत एल. मिंज नामक व्यक्ति ने एसीबी में दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर एसीबी ने 8 सितंबर 2002 को जाल बिछाकर भानु प्रताप प्रसाद को 100 रुपये के सात नोटों (कुल 700 रुपये) के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। तलाशी के दौरान उसके पास से 6,500 रुपये नकद भी बरामद किए गए थे।
गवाही और फैसला: एसीबी के विशेष लोक अभियोजक आलोक कुमार ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत में कुल 15 गवाहों की गवाही दर्ज कराई थी। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने उसे दोषी पाया।
जमीन घोटाले के चर्चित मामलों में भी आरोपी हैं भानु प्रताप:
भानु प्रताप प्रसाद का नाम पूर्व में झारखंड के कई बड़े भूमि घोटालों में भी सामने आ चुका है। प्रोन्नति पाकर वह सीआई (Circle Inspector) बन गया था। बड़गाईं अंचल में पदस्थापन के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सेना के कब्जे वाली 4.55 एकड़ जमीन और बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन की कथित हेराफेरी व फर्जीवाड़े के मामले में 13 अप्रैल 2023 को उसे गिरफ्तार किया था। ईडी की छापेमारी के दौरान उसके ठिकानों से भारी मात्रा में जमीन के फर्जी दस्तावेज बरामद हुए थे। फिलहाल वह उन मामलों में जमानत पर जेल से बाहर है।

