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HC News: झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सड़क दुर्घटना में मिठाई विक्रेता की मौत पर परिजनों का मुआवजा बढ़ाया, बीमा कंपनी की याचिका खारिज

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By CourtNews Desk On 15 Sep, 2026
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अदालत ने कहा: एफआईआर (FIR) की प्रविष्टि को बिना ठोस सबूत के पॉलिसी उल्लंघन का आधार नहीं माना जा सकता; मुआवजा ₹6.72 लाख से बढ़ाकर ₹15.38 लाख किया गया।

Ranchi News: झारखंड उच्च न्यायालय ने सड़क दुर्घटना में मारे गए एक 28 वर्षीय मिठाई विक्रेता के आश्रितों को बड़ी राहत देते हुए दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा निर्धारित मुआवजे की राशि में दोगुनी से अधिक की बढ़ोतरी की है। मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए मुआवजा राशि ₹6,72,432 से बढ़ाकर ₹15,38,000 कर दी है। इसके साथ ही, अदालत ने बीमा कंपनी की वह अपील भी खारिज कर दी जिसमें वाहन मालिक से वसूली (Pay and Recover) का अधिकार मांगा गया था।

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अदालत के प्रमुख निष्कर्ष एवं फैसले के मुख्य बिंदु:

  • FIR नहीं है प्राथमिक सबूत: बीमा कंपनी (द न्यू इंडिया एश्योरेंस) ने तर्क दिया था कि दुर्घटना के समय वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्री सवार थे, जिसका उल्लेख एफआईआर में है। अदालत ने ‘स्वर्ण सिंह’ और ‘हसीब’ मामलों के सुप्रीम कोर्ट के नज़ीरों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि एफआईआर की बातें स्वतः साबित सबूत नहीं होतीं। बीमा कंपनी को यह उल्लंघन साबित करने के लिए ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत करने थे, जिसमें वह विफल रही।

  • आय का न्यायसंगत आकलन: यद्यपि मृतक (पिंटू मंडल) की सटीक आय का कोई लिखित या दस्तावेज़ी प्रमाण उपलब्ध नहीं था, फिर भी चश्मदीद और मौखिक गवाहियों के आधार पर अदालत ने माना कि वह नियमित रूप से मिठाई की दुकान चलाता था। न्यायालय ने न्यूनतम मजदूरी की निचली सीमा या मात्र बाज़ार के दिनों (हाट) की सीमित कमाई के तर्क को खारिज करते हुए मृतक की काल्पनिक मासिक आय ₹7,500 तय की।

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