अदालती फैसला: जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पारित किया आदेश
कानूनी राहत: सरायकेला-खरसावां के आदित्यपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी रद्द, अब नहीं चलेगी कोई न्यायिक प्रक्रिया
- चुनावी आचार संहिता का था मामला: वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान कथित नियमों के उल्लंघन को लेकर दर्ज हुई थी प्राथमिकी।
- बचाव पक्ष की दलील: याचिका में कहा गया था कि दर्ज एफआईआर और उसके आधार पर निचली अदालत में चल रही कार्रवाई कानून सम्मत नहीं है।
Ranchi News: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड हाई कोर्ट से बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना में उनके खिलाफ दर्ज आचार संहिता उल्लंघन (Model Code of Conduct Violation) मामले की प्राथमिकी (FIR) को पूरी तरह से निरस्त (Quash) कर दिया है। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने मामले से जुड़े सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। इस फैसले के साथ ही मुख्यमंत्री के खिलाफ इस मामले में चल रही तमाम कानूनी और न्यायिक कार्यवाहियों पर पूरी तरह विराम लग गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रदीप चंद्रा ने बहस की थी।
कांड संख्या 418/2014 को दी गई थी चुनौती
यह पूरा मामला वर्ष 2014 के झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान का है, जब कथित रूप से आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में आदित्यपुर थाना में कांड संख्या-418/2014 के तहत हेमंत सोरेन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस एफआईआर को कानून सम्मत न बताते हुए मुख्यमंत्री की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इसे रद्द करने की गुहार लगाई गई थी। इतने वर्षों से लंबित रहने के कारण यह मामला लंबे समय से कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ था।
निचली अदालत के ट्रायल पर पहले ही लग चुकी थी रोक
हाई कोर्ट में इस मामले की पूर्व में हुई सुनवाइयों के दौरान ही अदालत ने गंभीरता दिखाते हुए निचली अदालत (Trial Court) में चल रही प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद से लगातार मुख्य याचिका पर हाई कोर्ट में नियमित सुनवाई हो रही थी। अंतिम सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार और याचिकाकर्ता दोनों पक्षों के अभिलेखों व साक्ष्यों का गहन अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि मामले में आगे की कार्रवाई जारी रखना न्यायसंगत नहीं है, जिसके बाद मुख्यमंत्री की क्रिमिनल रिट याचिका को स्वीकार करते हुए प्राथमिकी निरस्त करने का आदेश सुनाया गया।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज, कानूनी प्रक्रिया समाप्त
हाई कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद राज्य के राजनीतिक और कानूनी हलकों में सरगर्मी तेज हो गई है। चूंकि यह मामला लगभग 12 वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा था, इसलिए इसे मुख्यमंत्री के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी विजय माना जा रहा है। अब एफआईआर निरस्त होने के बाद इस केस से जुड़ी तमाम फाइलें बंद हो गई हैं।