Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने रामगढ़ जिले में निजी औद्योगिक इकाइयों द्वारा फैलाए जा रहे वायु और जल प्रदूषण को लेकर दायर जनहित याचिका (W.P. (PIL) No. 3483 of 2024) का निष्पादन करते हुए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) का अभिन्न अंग है और उद्योगों के संचालन तथा पर्यावरण सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है। यह याचिका पटना निवासी राम किशोर (वर्तमान निवासी रामगढ़) द्वारा दायर की गई थी, जिसमें बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग लिमिटेड (प्रतिवादी सं. 6) और दयाल स्टील लिमिटेड (प्रतिवादी सं. 7) द्वारा चिमनियों से जहरीला धुआं और धूल छोड़ने तथा दामोदर नदी व आसपास के जल स्रोतों को दूषित करने का आरोप लगाया गया था।
हाईकोर्ट द्वारा जारी मुख्य दिशा-निर्देश:
सरप्राइज इंस्पेक्शन (औचक निरीक्षण): JSPCB के हजारीबाग क्षेत्रीय अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे दोनों औद्योगिक इकाइयों का साल में कम से कम दो बार निरीक्षण करें, जिनमें से एक निरीक्षण बिना किसी पूर्व सूचना (Prior Notice) के होना चाहिए।
48 घंटे से अधिक प्रदूषण पर कारण बताओ नोटिस: यदि उद्योगों का ‘कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम’ (CAMS) 48 घंटे से अधिक समय तक तय सीमा से अधिक उत्सर्जन दिखाता है, तो बोर्ड को 7 दिनों के भीतर कारण बताओ नोटिस जारी करना होगा।
पानी के नमूनों की दोबारा जांच: विवा इंटरनेशनल स्कूल के पास और दामोदर नदी के अपस्ट्रीम व डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों से 3 महीने के भीतर मान्यता प्राप्त लैब से दोबारा पानी के सैंपल लेकर जांच कराने और रिपोर्ट रामगढ़ उपायुक्त को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
दस्तावेजों की गहन समीक्षा: अगले 2 महीनों के भीतर दोनों कंपनियों के एनवायरनमेंट क्लीयरेंस, सीटीई (CTE) और सीटीओ (CTO) की स्थिति जांचकर एक समेकित फाइल तैयार की जाएगी। यदि कोई अनुमति समाप्त पाई जाती है तो कानूनी कार्रवाई होगी।
अदालत में अनुपालन शपथ पत्र: झालसा/JSPCB के सदस्य सचिव को अगले 4 महीने के भीतर अदालत में इन सभी निर्देशों के पालन का अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल करना होगा।
अदालत ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी है कि यदि भविष्य में आदेशों का उल्लंघन होता है या प्रदूषण बढ़ता है, तो वे नई याचिका दायर करने के बजाय इसी मामले में मध्यवर्ती आवेदन (IA) दाखिल कर सकते हैं।

