Ranchi (HC News): आदेश का अनुपालन न करने और बार-बार समय विस्तार (extension) की मांग करने पर राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के रवैये के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
हाई कोर्ट ने इसे आदेशों और दिए गए आश्वासनों का जानबूझकर उल्लंघन मानते हुए राज्य की गृह सचिव वंदना दादेल और JSSC के सचिव सुधीर कुमार गुप्ता को अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कारण बताओ (Show-cause) नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने विभिन्न जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
अफसरों के ‘ब्लेम गेम’ पर अदालत की नाराजगी
पीठ ने मौखिक और लिखित टिप्पणियों में कहा कि राज्य सरकार और JSSC एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अदालत के आदेशों की अनदेखी करते रहे हैं।
– कोर्ट ने कहा कि अधिकारी हर बार समय सीमा समाप्त होने से ठीक पहले नियमित बहाने बनाकर समय विस्तार की अर्जियां दाखिल कर देते हैं।
– अदालत ने यह भी दर्ज किया कि 25 जून 2026 को दिए गए स्पष्ट निर्देशों और चेतावनी के बावजूद अधिकारियों के आचरण में कोई बदलाव नहीं आया और यह प्रक्रिया बेरोकटोक जारी रही।
नोटिस और अनुपालन के मुख्य बिंदु
*-15 अक्टूबर तक मांगा जवाब: अदालत ने दोनों अधिकारियों को अवमानना नोटिस का जवाब हलफनामे (Affidavit) के माध्यम से 15 अक्टूबर 2026 तक दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस जवाब के लिए कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। फिलहाल, दोनों अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी से छूट रखी गई है।
– समय विस्तार अर्जियों पर टिप्पणी: अदालत ने JSSC द्वारा पांच महीने और राज्य सरकार द्वारा छह हफ्ते की अतिरिक्त मोहलत मांगने की अर्जियों में दिए गए कारणों को बेहद सतही और गैर-जरूरी बताया।
– अंतिम समय सीमा तय: अत्यंत अनिच्छा के साथ कोर्ट ने 1 अप्रैल 2026 के आदेशों का अनुपालन पूरा करने के लिए JSSC को 30 नवंबर 2026 तक की अंतिम मोहलत दी है।
इस मामले में कारण बताओ नोटिस के जवाब पर विचार करने के लिए अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि 26 अक्टूबर 2026 तय की है।

