Ranchi: झारखंड के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के हाईकोर्ट के बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद अब तक प्रभावी अनुपालन नहीं होने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई है।
मंगलवार को हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस अधिकारियों की रुचि यह सुनिश्चित करने में है कि पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाएं। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए वर्तमान डीजीपी तदाशा मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ अदालत के आदेश की अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि 18 जून के आदेश के साथ-साथ इससे पहले हाईकोर्ट की विभिन्न पीठों की ओर से कई बार थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं होना गंभीर विषय है।
टेंडर रद्द करने के बहाने से कोर्ट असंतुष्ट
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पहले टेंडर निकालने और बाद में उसे रद्द किए जाने समेत अन्य कारण बताए गए। इस पर अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ये कारण और बहाने संतोषजनक नहीं हैं।
कोर्ट ने कहा कि आदेश के अनुपालन के लिए पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद अब तक किसी भी पुलिस थाने में सीसीटीवी कैमरे लगाने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
खंडपीठ ने कहा कि 18 जून को डीजीपी के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी करने पर विचार किया गया था। हालांकि, राज्य को एक और अवसर देते हुए आदेश के अनुपालन का मौका दिया गया था। साथ ही मुख्य सचिव और गृह सचिव को भी आदेश की गंभीरता से डीजीपी को अवगत कराने और हाईकोर्ट के निर्देश का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया था।